शनिवार, 26 फ़रवरी 2011

"अनियमित - नियम "

     अरे बंधुवर !चौंकिये मत | आज वाकई एक कीड़ा  काट गया है ,कि एक नियम बनातें हैं कि कोई भी नियम न बनाने का | मेरा मतलब  है कि ज़रा 
अनियमित  हो कर उसी नियम का पालन करें ,एक खेल की  तरह या कहूं 
शौक के रूप में | 
      नियम बना कर अगर हम कोई काम करतें हैं ,तो थोड़े समय बाद हम 
उससे ऊब कर भार  समझ  कर  निभाते  हैं  फिर  बचाव  के रास्ते खोजने
लगते हैं | पहले तो खुद से ज़बरदस्ती  करने  की कोशिश करतें  हैं कि इसे 
पूरा करना ही है | थोड़े  समय  बाद सोचते  हैं कि इसको पूरा करना चाहिए |
अब सबसे खतरनाक दौर आ जाता है और खुद से ही सवाल-जवाब का एक 
नया दौर शुरू हो जाता है कि आखिर इसको हम करें ही क्यों !बस इन  सब 
परिस्थितियों से बचने के लिए ही ये रास्ता समझ में आया है |
      अनियमित नियम का सब से बड़ा फ़ायदा है कि मन हरदम एक छोटा 
सा बच्चा बना रहता है जिसका उद्देश्यरहित उद्देश्य ही होता है मस्ती करना
| यहाँ "मस्ती"शब्द इसलिए अधिक उपयुक्त है | मज़ा , आनंद या इस तरह के अन्य भाव थोड़े से यांत्रिक प्रतीत होते हैं | "मस्ती" शारीरिक , मानसिक 
हर स्तर पर हर लम्हे -हर भंगिमा को जीना लगता है |
    इस विचार को कुछ यूँ भी समझ सकते हैं कि आप नियम से रोज़ क्रिकेट 
खेलने जाते हैं - घड़ी में पांच बजे खेलने गए हैं और छ:बजे लौटना है लेकिन तभी आप शतक भी बनाने वाले हैं | आप क्या करेंगे नियम के अनुसार लौट 
आयेंगे अथवा शतक पूरा करेंगे ? नियम के अनुसार अगर वापस आ जाते हैं 
तो मन में दूसरा स्वर लगातार चलता रहेगा |अनियमित नियम के अनुसार 
शतक पूरा कर के लौटने पर एक अलग तरह की  ऊर्जा  अनुभव करेंगे | इस 
प्रकार नियम तोड़ने से नुकसान भी कुछ नहीं होगा |
   देखा आपने अनियमित नियम का पालन करने से आप कुछ अधिक और 
अलग तरह का आनंद प्राप्त करेंगे | बस एक चीज़ का ध्यान रखना पडेगा कि 
इस से किसी को परेशानी न हो | अपने राम तो अबसे यही करेंगे ,बाकी मर्जी आपकी !!!

9 टिप्‍पणियां:

  1. कुछ ढील भी छोड़नी पड़ती है जीवन में।

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  2. हमने भी कई बार कई नियम बनाए पर पूरे नहीं हो पाते। टूट जाते हैं। क्‍या करें।

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  3. ऐसी ही नियमबद्धता का सम्‍मान होता है हमारे मन में.

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  4. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  5. टिप्पणी करने में नियमित ही रहियेगा । धन्यवाद ।

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