शनिवार, 3 दिसंबर 2022

महाभारत के चरित्र : विकर्ण



विभिन्न पौराणिक ग्रन्थों के कई चरित्र अपनी चरित्रगत विशिष्टता (अच्छी अथवा बुरी, दोनों ही) के लिए मानस में स्थान बना ही लेते हैं और वो जाने-अनजाने ही जीवन क्षेत्र में हमको प्रभावित भी करते हैं। यदि हम महाभारत को केन्द्र में रख कर मनन करें तो भीष्म सामर्थ्यवान होते हुए भी अपनी प्रतिज्ञा के चक्रव्यूह में उलझ कर अपने कुल के विनाश के सहभागी एवं विवश दृष्टा बने रह गए, तो धृतराष्ट्र अपने पुत्रमोह एवं राजसत्ता के दावानल में झुलसते रहे। जहाँ युधिष्ठिर तथाकथित धर्म का आवरण ओढ़े द्यूत में परिजनों को होम कर बैठे, वहीं दुर्योधन स्वयं को ठगा अनुभव कर के उद्दण्ड होता गया और सबको नकारता चला गया। विदुर और कृष्ण ने भी युद्ध रोकने का प्रयास किया, परन्तु असफ़ल ही रहे। 


उपरोक्त सभी चरित्र अपनेआप में अनेकानेक विशिष्टताओं का समावेश किये बैठे हैं, परन्तु महाभारत के जिस चरित्र ने मुझको सर्वाधिक प्रभावित किया वह विकर्ण है। धृतराष्ट्र के सौ पुत्रों में से, उनका सबसे छोटा पुत्र था #विकर्ण । 


एक तरह से देखा जाए तो राज्य लालसा से छटपटाते धृतराष्ट्र, अहंकार से चूर दुर्योधन, विवश एवं गुप्त बदले की लालसा से ग्रसित शकुनि के साथ एवं सरंक्षण में होते हुए भी, विकर्ण ने सच का साथ नहीं छोड़ा था। महाभारत के युद्ध की जब पृष्ठभूमि रची जा रही थी, तब प्रत्येक घटना पर विकर्ण ने प्रतिरोध किया था। जब कृष्ण पाँच गाँव के सन्धि वार्ता के प्रस्ताव के साथ आये थे और कौरव इसके लिए तैयार नहीं हुए थे, तब भी विकर्ण ने कौरवों का विरोध किया था। द्यूत सभा के पीछे छुपी हुई, शकुनि की मंशा को समझ कर, उसका भी विरोध किया था। उस द्युत की चरम परिणति, समस्त राजकीय गौरव एवं पाण्डवों को भी हारने के बाद, जब द्रौपदी को दाँव पर लगाया जा रहा था, तब भी विकर्ण ने सबको रोकने का प्रयास किया। इन सब में विफल होने के बाद भी उसने न्याय एवं सच का साथ नहीं छोड़ा और द्रौपदी के वस्त्रहरण के समय भी, जब भीष्म इत्यादि तथाकथित महारथी भी मुँह फेर के विवशता प्रदर्शित कर रहे थे, तब भी विकर्ण ने प्रबल विरोध किया और दुर्योधन के द्वारा प्रताड़ित हो कर सभा से चला गया था। 


विरोध विदुर ने भी किया था, परन्तु उनके लिये कौरव एवं पाण्डव एक से थे, जिसमें से उन्होंने सच एवं धर्म के संगी पाण्डवों का साथ देना चुना, परन्तु विकर्ण ने न्याय के लिए अपने ही परिवार का विरोध किया। ऐसा विशिष्ट व्यक्तित्व, विकर्ण महाभारत का एक बहुत कम चर्चित, परन्तु मेरा प्रिय चरित्र है। 

#निवेदिता_श्रीवास्तव_निवी 

#लखनऊ