मंगलवार, 22 सितंबर 2020

ये ख़ामोश औरतें ....



घुटी घुटी सी साँसों में साँस भरती 

बेबसी से पलके खोलती मुंदती 

हिचकियों में बेहिचक खटखटाती

दम तोड़ती हैं ये खामोश औरतें !

                            

आसमान छूते कहकहे

दम तोड़ते अबोली सिसकी पर 

आसमान छूने को उचकती

बिना रीढ़ की ये लुढ़कती औरतें !   


ये औरतें न बस औरतें ही हैं

बेबात ही हँस के रो देती हैं

सब के आँसू दुलार से सुखा 

आँचल अपना भिगोती ये औरतें !


खुशियों से चमकती सी आँखें देख

सबकी खुशी में तृप्त होती ये औरतें

सबके दिल का आईना चमकाती 

दम तोड़ती सिसकियों सी लरजती ये औरतें !

                        ... निवेदिता श्रीवास्तव 'निवी'