शुक्रवार, 20 मार्च 2020

मंज़िल मिल जाएगी ....

कैसे कह दूँ कि मैं परेशान नहीं हूँ
बिखरी सी राहों में पशेमान नहीं हूँ
उखड़ी सी साँसों से साँस भरती है
हाथों को नज़रों से थाम कहती है
जानेजां कर तू परस्तिश हौसलों की
इन्हीं राहों में हम फिर मिल चलेंगे
ज़िंदगी जिंदादिल वापस मुस्करायेगी
अपने होने का यूँ एहसास कराएगी
लरज़ते कदमों से ही तू चल तो सही
कह रही 'निवी' मंज़िल मिल जाएगी
      .... निवेदिता श्रीवास्तव 'निवी'

3 टिप्‍पणियां:


  1. जय मां हाटेशवरी.......

    आप को बताते हुए हर्ष हो रहा है......
    आप की इस रचना का लिंक भी......
    22/03/2020 रविवार को......
    पांच लिंकों का आनंद ब्लौग पर.....
    शामिल किया गया है.....
    आप भी इस हलचल में. .....
    सादर आमंत्रित है......

    अधिक जानकारी के लिये ब्लौग का लिंक:
    https://www.halchalwith5links.blogspot.com
    धन्यवाद

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