शनिवार, 13 अप्रैल 2019

चन्द हाइकू

मन बावरा
बन बन भटका
मन भर का ...

रूखे बेरुखी
मन ही मन भावे
ये मेरा मन ...

प्रीत है सच्ची
फिर भी मन रूठे
जग न छूटे

नाराज़ नहीं
जीवन जी रही हूँ
नासमझ हूँ ... निवेदिता

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