मंगलवार, 13 अप्रैल 2021

ईरघाट ते बीरघाट

 सच अजीब है ये मानव मन कुछ भी कहो समझता ही नहीं ... पता नहीं क्या हो गया है ... इतनी तेज लू चल रही है कि सब तरफ़ पानी ही पानी दिख रहा है । सच्ची इतनी भयंकर लू में ग़ज़ब की बाढ़ आयी है भई 😏


जानते हैं जब इतनी परेशानियाँ घेरती हैं न तब मेरी आँखों में तीखी धूप की चमक भर जाती है ... उसी में वो क्या कहते हैं कि कोढ़ में खाज होना जैसे ,न जाने कौन दिलजला घण्टी की लाइट जला गया । बताओ भला जो भी देखेगा यही कहेगा न कि दिन - दुपहरी में लाइट जलाए बैठे हैं । घर के अंदर से इतनी जोर - जोर से फूंक रही थी पर लाइट बन्द ही नहीं हुई । सोचा कि चलो पंखा ही चला दूँ ,वो भी पूरी रफ़्तार से ... इधर सोचना था कि पैरों ने उठने देने का इंतजार भी नहीं किया और चल दिये हड़बड़ी में ... फिर ? फिर क्या 😏 वही हुआ जो नहीं होना था और एक पैर की चप्पल चल दी ईरघाट तो उसकी जोड़ीदार दूसरे पैर की पुलिसिया अंदाज़ में चली गयी बीरघाट ... अब क्या - क्या बताऊँ मैं बिचारी ... इस भगदड़ में मेरे पैरों की कुहनी जा टकराई ओस की बूंद से ... अब आप ये मत पूछिए कि इस तपती दुपहरी में ओस की बूंद कहाँ से आ गयी ! आप सिर्फ़ एक बात का जवाब दीजिये कि आप उस से पूछ कर कुछ करते या कहीं आते - जाते हैं ? नहीं न ... तो फिर वो क्यों आपको जवाब दे या बात माने !

हाँ ! तो ओस की बूंद से टकरा कर पैरों की कुहनी की कटोरी अपने बाकी के साथियों ,प्लेट चम्मच वगैरा के पास जाने की तैयारी में कमर कसने लगी ... पर हम भी हम ही ठहरे पकड़ लाये उस को और उसमें करेले की बेल लगा ही दी ... पूछिये ... पूछिये न कि बेल लगाई क्यों ? उससे भी बड़ी बात कि बेल लगाने की ज़ुर्रत कर भी ली तो करेला ही क्यों याद आया ? लौकी की क्यों नहीं लगाई ? जानती हूँ पूछे बिना आप रह ही नहीं सकते हैं ,क्योंकि बिना पूछे तो किडनी के सारे पत्थर दिमाग मे चले जाएंगे और आपकी आँखों को हिचकी लग जायेगी और पलकों की धड़कन रुकने का सब पाप हमारे मत्थे डाल दीजिएगा ... न भाई न ,अपने पाप आप अपने ही पास रखो ,हम तो स्वावलंबी होना सीख गए हैं और जितनी जरूरत होगी न उतने पाप हम खुद ही कमा लेंगे ।

चलिए हम बता ही देते हैं कि हमने ऐसा क्यों किया 🤔 अरे करेले की कड़वाहट उसमें भर जाएगी न तो हाथों के घुटने उस को मुँह नहीं लगाएंगे 😅😅 वैसे भी बड़ा मुश्किल होता है अपने ही हाथों के घुटने को अपने ही मुँह लगा पाना । सच्ची कर के देखो आप ... और अगर कर सको तो मुझे जरूर बताना ,मैं टिकट लगा कर सबको दिखाऊंगी ... और हाँ ! जो पैसे आएंगे अपन आधा - आधा बाँट लेंगे आखिर आइडिया मेरा और मेहनत आपकी जो है ।
    ... निवेेदिता श्रीवास्तव #निवी

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (14-04-2021) को  ""नवसम्वतसर आपका, करे अमंगल दूर"  (चर्चा अंक 4036)  पर भी होगी। 
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    मित्रों! चर्चा मंच का उद्देश्य उन ब्लॉगों को भी महत्व देना है जो टिप्पणियों के लिए तरसते रहते हैं क्योंकि उनका प्रसारण कहीं भी नहीं हो रहा है। ऐसे में चर्चा मंच विगत बारह वर्षों से अपने धर्म को निभा रहा है। 
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    भारतीय नववर्ष, बैसाखी और अम्बेदकर जयन्ती की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
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  2. ये इरघाट ते बीरघाट कुछ पल्ले न पड़ा हमें तो ... करेला वरेला भी चख लिया ... पता न तुम क्या कहना चाह रहीं . लगता कि अब तो सच्ची बुड्ढे हो गए हम .

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