बुधवार, 4 नवंबर 2020

तुम प्रियवर उससे उज्ज्वल ...

नवगीत


पूजन का ये थाल सजाये

सुख - सुहाग माँगू हर पल !


सरस सलिल सी बहती धारा

घाट - घाट चलती लहराती

संग पथिक दो चलते हर पल

मलयानिल उनको महकाती 

तिरछी चितवन नेह बसाए

बढ़ते जाते बन सम्बल !


चन्द्र किरण मद में बलखाती 

रजनी अंचल बीच छुपाये

इत उत झाँके बन शोख अदा

ललित रूप उर को भरमाये

मन बरबस ही गाता जाये

जीवन नदिया हो निर्मल !


पवन झकोरा आये साथी 

अलबेली यादें ले आया

बदली से झाँके जब चन्दा 

साँसों में मधुमास है छाया 

उदित चन्द्र की पुलकित आभा 

प्रियवर तुम 'निवी' के उज्ज्वल !

     ... निवेदिता श्रीवास्तव 'निवी'


5 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 5.11.2020 को चर्चा मंच पर दिया जाएगा। आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी|
    धन्यवाद
    दिलबागसिंह विर्क

    जवाब देंहटाएं