शुक्रवार, 2 अगस्त 2019

दोहे

दोहे

1
बदरा बरस बरस गये ,मन क्यों भया उदास
चलने की बेला सखी ,देव मिलन की आस

2
खोल मन की खिड़कियाँ ,हँस रहा अमलतास
वासनायें उड़ा चली ,ले ले तू कल्पवास 

3
चमके चपला दामिनी ,मन में हुआ उजास
मोती बन बादल झरे  ,क्यों करे अविश्वास 

4
जीवन डगर लगे कठिन ,न कर कभी उपहास
सम्हल कर तू कदम रख , समय करे परिहास 

निवेदिता

2 टिप्‍पणियां:


  1. जय मां हाटेशवरी.......
    आप को बताते हुए हर्ष हो रहा है......
    आप की इस रचना का लिंक भी......
    04/08/2019 रविवार को......
    पांच लिंकों का आनंद ब्लौग पर.....
    शामिल किया गया है.....
    आप भी इस हलचल में......
    सादर आमंत्रित है......

    अधिक जानकारी के लिये ब्लौग का लिंक:
    http s://www.halchalwith5links.blogspot.com
    धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं