जीवन अपना
एक आइसक्रीम जैसा
इसको तो पिघलना है
चाहे इसके छोटे टुकड़े कर के
मुँह में रख लें ,या फिर
हाथ में थाम कर देखते रहें
और व्यर्थ जाने दें ...…
ये जो छोटे - छोटे से पल हैं
जी चाहे तो जी लो
जी न चाहे तो बीत जाने दो
पर पिघली हुई आइसक्रीम
पिघल कर याद बहुत आती है ..... निवेदिता