शुक्रवार, 27 दिसंबर 2019

लघुकथा : निशान अँगूठी का

लघुकथा : निशान अँगूठी का

क्यों उदास बैठी हो ...
कुछ नहीं माँ ...
अब तो वह रिश्ता टूट गया जिसने तुमको तोड़ दिया था ,फिर क्यों परेशान हो ?
माँ अंगूठी तो उतार दी ,पर अंगूठी के  इस निशान का क्या करूँ ...

.... निवेदिता श्रीवास्तव 'निवी'

3 टिप्‍पणियां:


  1. जय मां हाटेशवरी.......

    आप को बताते हुए हर्ष हो रहा है......
    आप की इस रचना का लिंक भी......
    29/12/2019 रविवार को......
    पांच लिंकों का आनंद ब्लौग पर.....
    शामिल किया गया है.....
    आप भी इस हलचल में. .....
    सादर आमंत्रित है......

    अधिक जानकारी के लिये ब्लौग का लिंक:
    http s://www.halchalwith5links.blogspot.com
    धन्यवाद

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  2. कम शब्दों में गहरी बात। बहुत बढ़िया।
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।
    iwillrocknow.com

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