मंगलवार, 4 सितंबर 2012

आज ........ कल ........

मेरी यादों में 
मेरे वादों में 
मेरे इरादों में 
किलकता 
मेरा जो "हास" है 

पलकें थकने पर 
श्वासें अटकने पर 
सब के सब्र की
इति होने पर 
हाँ बस यही कल 
मेरा "इतिहास" है !!!
            - निवेदिता 


17 टिप्‍पणियां:

  1. ओह ओह ...क्या बयानगी है चंद ही पंक्तियों में..

    जवाब देंहटाएं
  2. इतिहास की प्रस्तुति सुन्दर है ,बधाई मंजुल भटनागर

    जवाब देंहटाएं
  3. बस छोटा सा जीवन, छोटी आशायें, छोटी आशायें..

    जवाब देंहटाएं
  4. बेह्तरीन अभिव्यक्ति .आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको
    और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

    http://madan-saxena.blogspot.in/
    http://mmsaxena.blogspot.in/
    http://madanmohansaxena.blogspot.in/

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर भाव लिए
    बेहतरीन रचना...
    :-)

    जवाब देंहटाएं
  6. haas aur itihaas ...kshanbhangur jeevan ...!!
    bahut sundar ...!!

    जवाब देंहटाएं
  7. आप गज़ब करती हो ., गागर में सागर भरती हो

    जवाब देंहटाएं
  8. वाह जी क्या बात है बहुत सुन्दर।

    जवाब देंहटाएं