शनिवार, 4 जून 2011

सुनो ना ........

सुनो ना ,
आज इन हवाओं में ,
अजीब सी 
सरगोशियाँ हैं ,
मेरी कमियाँ 
बताते-बताते 
फेहरिस्त 
कुछ ज्यादा
बढ़ती गयी .......
पर ज़रा इनसे ,
पूछ कर देखो 
जब मैं ना हूँगी ,
तब.........
मुझमें तो नहीं,
क्यों कि मैं 
हूँगी ही नहीं 
पर क्या मेरी कमी 
कभी समझ पायेंगें .......
               -निवेदिता 

17 टिप्‍पणियां:

  1. गहन विचारों से ओतप्रोत बेहतरीन रचना

    जवाब देंहटाएं
  2. खुद को स्थापित करने की चाह .....
    फिर पूछना क्या ज़माने से ...!!

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत गहन अनुभूति.
    सुन्दर अभिव्यक्ति.
    शुभ कामनाएं.

    जवाब देंहटाएं
  4. बिल्कुल नहीं जी।
    भावुक कर गई रचना।

    जवाब देंहटाएं
  5. आपकी रचना यहां भ्रमण पर है आप भी घूमते हुए आइये स्‍वागत है
    http://tetalaa.blogspot.com/

    जवाब देंहटाएं
  6. पर क्या मेरी कमी
    कभी समझ पायेंगें .....यह प्रश्न अक्सर मन में उठता है ..अच्छी प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  7. बहुत ही उम्दा शब्द है !मेरे ब्लॉग पर आए ! आपका दिन शुब हो !
    Download Latest Music + Lyrics
    Shayari Dil Se
    Download Latest Movies Hollywood+Bollywood

    जवाब देंहटाएं
  8. जब हम ही नहीं होंगे तो ....बहुत गहरी सोच

    जवाब देंहटाएं
  9. मुझमें तो नहीं,
    क्यों कि मैं
    हूँगी ही नहीं
    पर क्या मेरी कमी
    कभी समझ पायेंगें .......
    bahut sunder kavita
    padh kr man prasann huaa
    badhai
    rachana

    जवाब देंहटाएं
  10. तब.........
    मुझमें तो नहीं,
    क्यों कि मैं
    हूँगी ही नहीं
    पर क्या मेरी कमी
    कभी समझ पायेंगें .......
    दार्शनिक भाव को सामने लाती पंक्तियाँ ....आपका आभार

    जवाब देंहटाएं
  11. पर क्या मेरी कमी
    कभी समझ पायेंगें ....
    बहुत गूढ़ प्रश्न कर दिया आपने?

    जवाब देंहटाएं
  12. पर क्या मेरी कमी
    कभी समझ पायेंगें .......

    इस प्रश्न का उत्तर ही शेष प्रश्न में बदलता है .

    जवाब देंहटाएं