कभी-कभी व्यस्तता रिश्तों में दूरियां आने का आभास दिलाती है ,पर ऐसे छोटे-छोटे पल उस भ्रम को दूर कर जातें हैं और सम्बन्धों की सत्यता जतला जाते हैं | हम इस अतिव्यस्त जीवन में हर रिश्ते के लिए एक ख़ास दिन नियत कर के अनेक अपेक्षाएं पाल बैठते हैं , पर क्या उन रिश्तों की सलामती की कामना सिर्फ उस दिन ही करते हैं | सच में तो हर आती जाती साँसे अपनों की और उनके अपनों के लिए दुआ ही करते हैं | पर ये भी सच है उस विशेष अवसर पर अपनों की अनुपस्थिति कष्ट दे जाती है .........
"आंखों" के झरोखों से बाहर की दुनिया और "मन" के झरोखे से अपने अंदर की दुनिया देखती हूँ। बस और कुछ नहीं ।
बुधवार, 15 अगस्त 2012
" फूलों का तारों का ,सबका कहना है "......
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