गुरुवार, 28 अप्रैल 2011

हां आज ही कर दूंगी ..........


ओ मेरे ?
व्यथित मन !
अब बस ,
आज ......
हाँ ! आज ही 
कर दूंगी 
तेरी विदाई ..........
यादों से भी ,
वादों से भी ...
अश्रुओं की 
वेणी बनाऊं ,
वेदना का 
पलना............
श्वांसों का 
चंवर डोलाऊं,
भीगे मन की 
अमृत-वर्षा !
देखा !
कर ली 
मैंने भी 
सारी तैयारी ....
तुझ से !
विलग ........
हो जाने की ..
बढ़े क़दमों को 
मंजिल मिले ,
या 
वृहत शून्य .............
                   -निवेदिता