"आंखों" के झरोखों से बाहर की दुनिया और "मन" के झरोखे से अपने अंदर की दुनिया देखती हूँ। बस और कुछ नहीं ।
याद आ गई
अल्हड़ अठखेली
शिशु की बोली !
मेरा जहान
मिठास भरी शान
प्यारा अहान !
खिला विहान
हँस पड़ा जहान
मिला अहान !
तीसरी पीढ़ी
खुशियों की हो सीढ़ी
ईश कृपालु !
भोले का हाथ
अहान तेरे माथ
रहेगा साथ ! #निवी