वो पावन सी समिधा
वो हवन की सुगंध
मंत्रो का सान्निध्य
झिझकते हुए कदम
अजनबी सी निगाहें
एक छोटा सा लम्हा
एक शोख सा रंग
एक बंधी हुई चुटकी
और धूसर सी मांग
पर चमकती लाली
शुक्र तारे को परे हटा
सूर्य किरणों ने ली
सपनीली सी अँगड़ाई …
महावर की ललछौंही चमक
बिछिये की श्वेत शीतलता
चूनर में झिलमिलाते
स्वपनिल सितारे
शुक्र तारे को परे हटा
सूर्य किरणों ने ली
सपनीली सी अँगड़ाई …
महावर की ललछौंही चमक
बिछिये की श्वेत शीतलता
चूनर में झिलमिलाते
स्वपनिल सितारे
दो जुड़े हाथों ने
सहेज ली अरमानों सजी
ईश्वरीय सौगातों से भरी
अपनी अलबेली तिजोरी ... निवेदिता
सहेज ली अरमानों सजी
ईश्वरीय सौगातों से भरी
अपनी अलबेली तिजोरी ... निवेदिता

