यह इत्तिफ़ाक ही तो है ,
जो अपना साथ है
ना मैं तुम्हे जानती ,
न तुम मुझे पहचानते
मैं तो थी अपनी पढ़ाई में मस्त
तुम थे अपना कैरियर बनाने में व्यस्त
शायद था , तुम से मिलना,
शाश्वत सत्य
सीप में मोती सा
सहेज रखा
इसे ही कहते हैं
जन्म -जन्मातर का साथ
आज जीवन की इस मधुरिम बेला में
लगता है सब तो पा लिया
प्यारे से दो चाँद -सितारे
आस्मां से मांग लाये
सच सज गया
अपना मन -आंगन
शायद इस जीवन का ही
दिया सबने आशीर्वाद
तभी तो मांगती हूँ
जन्म -जन्म का साथ
इन छब्बीस वर्षों का साथ ,
एक प्यारे सपने सा सजा है
स्वपनीली आखों में
तुम्हे भी मुबारक -मुझे भी मुबारक
ये ईश्वरीय वरदान सा अपना साथ ......... निवेदिता :)
