सोमवार, 3 फ़रवरी 2014

"ईश्वरीय वरदान सा अपना साथ "


यह इत्तिफ़ाक ही तो है ,
जो अपना साथ है 
ना मैं तुम्हे जानती ,
न तुम मुझे पहचानते 
मैं तो थी अपनी पढ़ाई में मस्त
 तुम थे अपना कैरियर बनाने में व्यस्त 
शायद था , तुम से मिलना,
शाश्वत सत्य 
सीप में मोती सा
सहेज रखा 
इसे ही कहते हैं
जन्म -जन्मातर का साथ 
आज जीवन की इस मधुरिम बेला में 
लगता है सब तो पा लिया 
प्यारे से दो चाँद -सितारे 
आस्मां से मांग लाये 
सच सज गया
अपना मन -आंगन
शायद इस जीवन का ही
दिया सबने आशीर्वाद 
तभी तो मांगती हूँ 
जन्म -जन्म का साथ 
इन छब्बीस वर्षों का साथ ,
एक प्यारे सपने सा सजा है
स्वपनीली आखों में 
तुम्हे भी मुबारक -मुझे भी मुबारक 
ये ईश्वरीय वरदान सा अपना साथ .........  निवेदिता  :)