बुधवार, 6 जुलाई 2011

तुम्हे देव पुकारूँ........

आज सोचती हूँ तुम्हे देव पुकारूँ
तो हे सूर्य देव तुम्हे कुछ बतलाऊँ ,
तुमसे निगाह नहीं मिला पाते हम ,
कभी कहते आँखों में चमक लगती ,
पर अगले ही पल अचानक ...
आँखों में अंधियारा छा जाता,
सच में तुम बहुत जलाते हो .....
पर ये तो उस से भी बड़ा है सच ...
देव हमें जलाने से पहले 
तुम ख़ुद भी झुलस जाते हो !
सांध्य काल तुम्हारी 
कम होती प्रखरता ,
प्रफुल्लित करती मन .......... 
पर अगले ही पल ,
घिरता अंधियारा 
याद तुम्हारी लाता 
चंदा को विदा करती ऊषा ....... 
अपनी लालिमा से 
सजाती विस्तृत आकाश , 
तुम्हारे स्वागत में 
अर्ध्य जल लिए खड़े हम 
कभी सूर्यान्जली देते 
कभी करते सूर्य नमस्कार 
सराहते स्वीकारते तुमको ..... 
पर फिर वही ...........
तुम्हारी तीखी प्रखरता 
विचलित  कर जाती मन .... 
                                 -निवेदिता