सोमवार, 22 फ़रवरी 2021

अवकाश प्राप्ति ( रिटायरमेंट )



जीवन की प्रथम श्वांस से ही हमारे सामने आनेवाले समय के लिये एक उद्देश्य मिल जाता है और हम यथासामर्थ्य उसको प्राप्त करने का प्रयास करते हैं । उंगलियों में कलम / पेंसिल पकड़ते ही अच्छी शिक्षा और उसमें भी अव्वल रहने का लक्ष्य साधने की बात दिमाग में भर दी जाती है । शिक्षा में पकड़ बनाते ही नया लक्ष्य सम्मुख आ जाता कि कोई अच्छी सी नौकरी / व्यवसाय हासिल करना है ... उसके बाद क्रमशः विवाह ,बच्चे ,उन बच्चों को व्यवस्थित करना इत्यादि ।

इतना सब करते हुए समय आ जाता है अवकाश प्राप्ति ( रिटायरमेंट ) का ... अब सबसे बड़ा प्रश्न कि कोई प्रश्न / लक्ष्य बचा और बना ही नहीं ... अब क्या करें ? पहले के संयुक्त परिवार में तो सबके साथ यह समय टीसता नहीं था ,परन्तु अब एकल परिवार का अकेलापन वीरानी ला विवश सा करता है प्रत्येक आती - जाती साँसों को गिनने के लिये ।

अक्सर तब एक ही प्रश्न ज़ेहन में दस्तक देता है कि अवकाश प्राप्ति का अर्थ जीवन की दूसरी जीवन्त पारी का प्रारंभ होता है या प्रतीक्षा जीवन के अंत की !

अवकाश एक ऐसा लम्हा है जिसकी हम बहुत चाहत रखते हैं ,परन्तु अवकाश प्राप्ति के बारे में तो सोचते ही नहीं है ,जबकि हम को सबसे अधिक तैयारी और सकारात्मकता की आवश्यकता इस समय ही चाहिए ।

अमूमन अवकाश प्राप्ति के बाद का समय निष्क्रियता को ही समर्पित मान लिया जाता है ,जिसको रूखे शब्दों में कहूँ तो चलती हुई साँसों के रुक जाने का ,अपनी मृत्यु की प्रतीक्षा बन जाती है ,जो सर्वथा गलत्त है ।

मुझको तो अवकाश प्राप्ति नये उन्मुक्त जीवन की शुरुआत सी लगती है । इस समय के पहले हम सिर्फ चुनौतियों का सामना करने ,स्वयं को प्रमाणित करने में ही व्यस्त रहते हैं और इन सब के बीच हम अपने शौक पूरे करना ,खुल के जीना भूले रहते हैं ,जो पहले बहुत जरूरी रहता है ।

यह भी सम्भव हो सकता है कि अवकाश प्राप्ति के बाद शायद हम शारीरिक रूप से कुछ परेशानियों से घिर गए हों ,तब भी यदि नाचने की इच्छा कभी कहीं दबी रह गयी हो तो बेशक हम मुक्त पवन सा लहरा न पाएं परन्तु थिरकने का प्रयास जरूर करना चाहिए । हो सकता है कि शास्त्रीय गायन की स्वर लहरियों को हमारी उखड़ती हुई साँसें न सम्हाल पाएं ,तब भी रैप की तरह निकली अपनी आवाज़ को गुनगुनाना मान कर चन्द साँसें सुकून की अपने फेफड़ों को मुस्कुराते हुए देना चाहिए । अपने जीवन की हर पेन्डिंग हो चुकी ख़्वाहिश को पूरा करने का प्रयास अवश्य करना चाहिए । और हाँ ! यदि आवश्यक न हो तो नौकरी नहीं करनी चाहिए ,बल्कि स्वेच्छा से समाज के प्रति कुछ सेवा जरूर करनी चाहिए ।

मैं अपनी बातों / विचारों को समेटते हुए सिर्फ़ इतना ही कहूंगी कि सबके प्रति जिम्मेदारियों को पूरा करने की थाली सजाने के बाद अब अपनी खुशियों की थाल परोसने में न तो संकोच करें और न ही कंजूसी । ऐसा करने से हमारे न रहने पर हमारा परिचय सिर्फ़ यही होगा कि ... हाँ ! यहाँ रहती थी मुस्कराती सकारात्मकता 😊 #निवी

3 टिप्‍पणियां:

  1. यदि आवश्यक न हो तो नौकरी नहीं करनी चाहिए ,बल्कि स्वेच्छा से समाज के प्रति कुछ सेवा जरूर करनी चाहिए । सबके प्रति जिम्मेदारियों को पूरा करने की थाली सजाने के बाद अब अपनी खुशियों की थाल परोसने में न तो संकोच करें और न ही कंजूसी । ऐसा करने से हमारे न रहने पर हमारा परिचय सिर्फ़ यही होगा कि ... हाँ ! यहाँ रहती थी मुस्कराती सकारात्मकता

    बहुत सटीक लिखा है आपने

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  2. बस सकारात्मक सोच ही जीवन को प्रफुल्ल करती है ।

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  3. सकारात्मकता ही जीवन है

    https://shabdsugandh.blogspot.com/

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