सोमवार, 12 मार्च 2012

पुनर्जन्म हो गया ....



माँ ! 
जानती हो 
इन नयनों से 
नींद की कुछ 
अनबन सी 
हो गयी है 
कभी तुम्हारा परस 
तो कभी दरस 
हाँ कभी लोरी में 
छुपी ममता की 
थपकी तलाशती हैं ....
कल नन्हीं हथेलियों ने 
मेरी उँगलियों को 
थाम कर कहा 
"माँ !हमें सुला दो "
कलियों सी मासूम 
पलकों को दुलराते 
चिड़ियों की चहक 
उधार लेते-लेते 
माँ ! मैंने अचम्भा देखा 
उन नन्हीं पलकों से
दोस्ती करती नींद ने 
मेरी आँखों से भी 
अबोला तोड़ दिया 
और सच में माँ !
मुझे लगा तुम्हारा 
पुनर्जन्म हो गया .....

21 टिप्‍पणियां:

  1. माँ से मां तक यह सिलसिला चलता है !

    जवाब देंहटाएं
  2. कल नन्हीं हथेलियों ने
    मेरी उँगलियों को
    थाम कर कहा
    "माँ !हमें सुला दो "

    sundar kavita

    जवाब देंहटाएं
  3. मेरी आँखों से भी
    अबोला तोड़ दिया
    और सच में माँ !
    मुझे लगा तुम्हारा
    पुनर्जन्म हो गया .....
    बहुत बढ़िया प्रस्तुति,भावपूर्ण सुंदर रचना,...

    RESENT POST...काव्यान्जलि ...: बसंती रंग छा गया,...

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत सुंदर कोमल अहसास...सुंदर भावपूर्ण रचना..

    जवाब देंहटाएं
  5. bahut hi sundar aur shandar post.

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुट ही सुंदर कोमल भावपूर्ण अभिव्यक्ति...

    जवाब देंहटाएं
  7. माँ की ममता अनमोल है, याद दिलाती अति सुन्दर प्रस्तुति.

    जवाब देंहटाएं
  8. dharti par bhagwan MAA ke hi roop mein to hai....bahut hi badhiya rachna....

    जवाब देंहटाएं
  9. यह सूत्र अनादि से अनन्त तक चला आ रहा है..

    जवाब देंहटाएं
  10. अनुपम भाव संयोजन लिए उत्‍कृष्‍ट अभिव्‍यक्ति ।

    जवाब देंहटाएं
  11. समय की करवट का खेल देखिये ... अपने अंदर माँ का प्रतिरूप नज़र आने लगता है ... उम्दा भाव लिए ....

    जवाब देंहटाएं
  12. कोमल यादें !
    सुन्दर प्रस्तुति !
    आभार !

    जवाब देंहटाएं
  13. माँ और ममता , दोनों ही पर्यायवाची है एक दुसरे के . यादों की वीथियों में घूम आये .

    जवाब देंहटाएं