बुधवार, 1 जनवरी 2020

बस इत्ती सी उम्मीद ~~~

 बस इत्ती सी उम्मीद ~~~

आने वाले लम्हों
जरा इतनी सी दुआ देना
आती - जाती साँसों में
अनगिनत लम्हे हो
मानते या मनवाते
या फिर बस
मन ही मन में रहें
थिरकतें - गुनगुनाते

पर  .....
न सिमटे रहें
किसी डायरी के
पन्नों में दुबके
चाहे हो बिंदु भर ही
पर कर लें बसेरा
कैलेण्डर के आनन पर
             ...... निवेदिता श्रीवास्तव 'निवी'

6 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छी प्रस्तुति
    नववर्ष मंगलमय हो आपका!

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  2. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 2.1.2020 को चर्चा मंच पर चर्चा - 3568 में दिया जाएगा । आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी ।

    धन्यवाद

    दिलबागसिंह विर्क

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  3. ...आशा की उम्मीद जगाती छोटी मगर प्रभावशाली रचना..!!

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  4. आने वाले लम्हों
    जरा इतनी सी दुआ देना
    आती - जाती साँसों में
    अनगिनत लम्हे हो
    मानते या मनवाते
    या फिर बस
    मन ही मन में रहें
    थिरकतें - गुनगुनाते।

    बहुत सुंदर सृजन।

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