बुधवार, 29 जून 2011

ये ज़िन्दगी .......



अंकुरित  होते 
पल्लवित  होते  
सांस-सांस श्वांस भरते 
एक-एक कर 
यूँ डग भरते
कब कहाँसे 
बढ़ चली ज़िन्दगी............

सोचा क्या-क्या 
क्या-क्या अरमान सजाये 
वर्षों का  सोच-सोच 
परत दर परत  तह लगाए
पता नहीं कैसे 
हाथ छुडा चली ज़िन्दगी ...........



आसमान को छूने की 
हसरत लिए ,पंखों ने इक 
आस भरी परवाज़ भरी ,
ना जाने कहाँ से सूरज सा चमक 
पंख जला गयी ज़िंदगी ........... 
                                -निवेदिता 



24 टिप्‍पणियां:

  1. आसमान को छूने की
    हसरत लिए ,पंखों ने इक
    आस भरी परवाज़ भरी ,
    ना जाने कहाँ से सूरज सा चमक
    पंख जला गयी ज़िंदगी ...........

    वाह!बहुत ही अच्छी पंक्तियाँ हैं ये.

    सादर

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  2. चलिए स्वर्ण तप कर ही निखरता है .....

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  3. इस भाव पूर्ण रचना के लिए बधाई स्वीकारें

    नीरज

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  4. नई सुबह फिर आएगी..बहुत भावपूर्ण रचना.

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  5. आसमान को छूने की
    हसरत लिए ,पंखों ने इक
    आस भरी परवाज़ भरी ,
    ना जाने कहाँ से सूरज सा चमक
    पंख जला गयी ज़िंदगी .... bahut hi gahre ehsaas

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  6. एक भावपूर्ण कविता. ..... आभार!

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  7. ओह! बहुत ही भावुक-सी जिंदगी की दास्ताँ सुनाती कविता है ये तो....

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  8. ज़िन्दगी को हल पर एक परीक्षा से गुज़रना पड़ता है।

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  9. नयी सुबह फिर आयेगी , उम्मीदों भरी सुन्दर प्रस्तुति

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  10. सोचा क्या-क्या
    क्या-क्या अरमान सजाये
    वर्षों का सोच-सोच
    परत दर परत तह लगाए

    बहुत सुन्दर रचना
    कभी हमारे ब्लॉग पर भी आगमन करे
    vikasgarg23.blogspot.com

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  11. जिंदगी की तमाम घटनाओं की प्रस्तुति ,बधाई

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  12. आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    चर्चा मंच

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  13. भुत भाव पूर्ण रचना बधाई |
    आशा

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  14. जिन्दगी कहती रही,
    थपेड़े सहती रही।

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  15. गहन शब्‍दों के साथ बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

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  16. आसमान को छूने की
    हसरत लिए ,पंखों ने इक
    आस भरी परवाज़ भरी ,
    ना जाने कहाँ से सूरज सा चमक
    पंख जला गयी ज़िंदगी ...........

    aashaon ke tinke chun chun kar sapno ka mahal banaya tha, tufaan se tinke bikhar gaye.....

    aisa hi kuch bhav liye behtareen rachna....

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  17. न जाने क्या क्या रंग दिखाए जिंदगी !

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  18. उर के गहन भावों की सुन्दर प्रस्तुति ........
    जिंदगी की विद्रूपताओं का भावपूर्ण चित्रण....

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  19. निवेदिता जी सुन्दर कृति -पर मन में पंख लगे रहना चाहिए -उडान न रुके
    आसमान को छूने की
    हसरत लिए ,पंखों ने इक
    आस भरी परवाज़ भरी ,
    ना जाने कहाँ से सूरज सा चमक
    पंख जला गयी ज़िंदगी

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  20. जिंदगी हर बार कुछ न कुछ नया कर जाती है ... लाजवाब रचना है ...

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  21. आसमान को छूने की
    हसरत लिए ,पंखों ने इक
    आस भरी परवाज़ भरी ,
    ना जाने कहाँ से सूरज सा चमक
    पंख जला गयी ज़िंदगी ........

    बहुत सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति..ज़िंदगी जाने कितने खेल दिखाती है..

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  22. जलते हुए पंखों का सम्मान यहाँ कौन करे ...
    समय नहीं है ...
    शुभकामनायें आपको !

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  23. किधर से शुरू करून, किधर से ख़तम करून |
    जिन्दगी का फ़साना, कैसे तेरी नज़र करून |
    है ख्याल जिन्दगी का, कैसे मुनव्वर करून |
    मगरिब के जानिब खड़ा, कैसे तसव्वुर करून |

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