शनिवार, 3 जून 2017

अनदेखा करना सीख लिया है ..........

चाहती थी 
एक कदम बढ़ाना 
और अनदेखा कर देना 

उन मुश्किलों को 
जिन्होंने थाम रखी है 
रफ्तार मेरी
हर बार
थम गये हैं कदम
उन्हीं अवरोधों पर
आज .....
बदल देती हूँ
देखने का तरीका
उन मुश्किल से भरे
पलों पर ही
रख देती हूँ कदमों को
अब उन पलों को
अनदेखा करना सीख लिया है
क्योंकि
मेरा कद बढ़ गया है उनसे
और मेरे कदमों तले
मिल गयी थोड़ी सी ऊँचाई ....... निवेदिता

बुधवार, 25 जनवरी 2017

न हो उदास ऐ सनम ........



न हो उदास ऐ सनम 
तेरी उदासी में 
मेरे मन में बसी
खामोश ओस ढलती है 
तेरे लबों की 
हल्की सी थिरकन
मेरी यादों की
घनी धुंध में
सूर्य किरण सी दमकती है ...... निवेदिता

शुक्रवार, 13 जनवरी 2017

जिंदगी कुछ यूँ भी सँवर जाती ......




तुम्हारे रुखसार पर घिरी 
ये जुल्फें जरा सिमट जातीं 
चांदनी कुछ और निखर जातीं 
ये रात शबनमी यूँ ही बरस जाती 

कभी आँखें छलक जातीं 
कहीं यादें भी बरस जातीं 
लम्हों से क्या शिकवा होता 
जिंदगी कुछ यूँ भी सँवर जाती  ...... निवेदिता