बुधवार, 25 जनवरी 2017

न हो उदास ऐ सनम ........



न हो उदास ऐ सनम 
तेरी उदासी में 
मेरे मन में बसी
खामोश ओस ढलती है 
तेरे लबों की 
हल्की सी थिरकन
मेरी यादों की
घनी धुंध में
सूर्य किरण सी दमकती है ...... निवेदिता

8 टिप्‍पणियां:

  1. ब्लॉग बुलेटिन टीम की ओर से आप को ६८ वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं |

    ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, "ब्लॉग बुलेटिन की ओर से ६८ वें गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  2. लबों की थिरकन बनी रहे ... जीवन यूँ ही चलता रहे ...

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  3. प्यारे पल यूँ ही बने रहे ..सुन्दर

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  4. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (29-01-2017) को "लोग लावारिस हो रहे हैं" (चर्चा अंक-2586) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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