शुक्रवार, 21 जुलाई 2017

अमावस की रात .......



अमावस की रात इतनी बेनूर सी सिसकी है
चाहत तो उसको भी थी खिलखिलाहट की
टिमटिमाते से सितारों  बगावत कर गये
कल आने का वादा कर दामन समेट गये
यूँ खुल के अंधेरा बरसा है किस के मन का
अपना साया भी अपनी राह भूल चल दिया ..... निवेदिता