रविवार, 23 जनवरी 2022

सिरहाने धरी हथेली ...

सिरहाने धरी हथेली की 

लकीरों में छुप के बैठे हुए !


पूरनम रेशों की तासीर में

कुछ अल्फ़ाज़ थे गुंथे हुए !


कहीं कुछ दम है घुटता सा

जैसे हो कोई साँसें रोके हुए !


पलकों ने नयन को है यूँ छुआ

चाँदनी खिली चंदोवा सँवारे हुए !


सामने रख दूँ जो खिली हथेली

गुल नजर आएंगे महकते हुए ! #निवी