शुक्रवार, 10 जून 2011

मैने महसूस किया है ..................


मैंने महसूस किया है ,
अपनी अंतिम साँसों को ,
माँ तुम्हारे आख़री लम्हों में !
तुम्हारी जाती साँसे ,जैसे 
लेती गयीं मेरा अल्हड़पन !
एक पल में ही स्तब्ध शून्य ,
बन खो गयी उन गलियों में ,
कहीं भूले से तुम दिख जाओ ,
उंगली पकड़ फिर सम्हाल दो !
पर दूर तक फैले सन्नाटे ने ,
जैसे मेरा अकेलापन और बढ़ा ,
कुछ पल और जीने की सुना दी सजा !
                                         -निवेदिता




32 टिप्‍पणियां:

  1. emotional poem...maa se bada kya hain dunia hain kuch nahi

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  2. वंदना जी का सन्देश --

    आपकी रचना यहां भ्रमण पर है आप भी घूमते हुए आइये स्‍वागत है
    http://tetalaa.blogspot.com/

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  3. वह वह बहुत ही अच्छे शब्द है !मेरे ब्लॉग पर जुरूर आए !
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  4. गहन भावों की सुन्दर प्रस्तुति।

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  5. आपकी रचना यहां भ्रमण पर है आप भी घूमते हुए आइये स्‍वागत है
    http://tetalaa.blogspot.com/

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  6. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (11.06.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
    चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

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  7. दिल से लिखी गयी रचना, आभार

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  8. अच्छी व भावुक रचना । मां की याद तन्हाई में दिलाने वाली

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  9. बहुत भावपूर्ण मर्मस्पर्शी प्रस्तुति..आभार

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  10. बेहतरीन!

    आपका स्वागत है "नयी पुरानी हलचल" पर...यहाँ आपके ब्लॉग की किसी पोस्ट की कल होगी हलचल...

    नयी-पुरानी हलचल

    धन्यवाद!

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  11. माँ के होने न होने की सूक्ष्मतर भावनाओं की मुखर प्रस्तुति!

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  12. maa... jiski kami duniya ka koi shakhs puri nhi kar sakta hai...

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  13. दस जून यानी आज ही पोस्ट की है यह रचना .
    यहाँ ना कोई रहा है ना कोई रहेगा.एक दिन तुम,मैं हम ...सब जायेंगे.माँ को भी जाना ही था.इस पीड़ा को बहुत गहराई से महसूस कर सकती हूँ मैं टो इकलौती बेटी थी उनकी. कविता दर्द तुम्हारा न् हो कर मेरा अपना भी हो गया जैसे.असर छोड़ गई है यह.

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  14. भावनात्मक अभिव्यक्ति!!!

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  15. बहुत भावपूर्ण मर्मस्पर्शी प्रस्तुति

    साभार- विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

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  16. maa isse bada kuch nahi hota
    vikas
    vikasgarg23.blogspot.com

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  17. कुछ पल और जीने की सजा ......./ बेहद संजीदा मार्मिक सृजन गहराईयों में उतरता हुआ ,प्रसंसनीय जी /बहुत बहुत आभार ...

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  18. मित्रों ,सराहना के लिये धन्यवाद .....
    इन्दु दी ,कल ही माँ-पापा की शादी की सालगिरह भी थी ..... सम्बोधन जरूर माँ था पर समर्पित दोनो को ही थी ..... सादर !

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  19. मा के जाने का गहरा एहसास बहुत कुछ बदल देता है ...

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  20. sach main mata pita kr rahte bachpan hamesha viraajmaan rahataa hai.unse badeker is duniya main koi nahi hotaa.bahut sambedansheel rachanaa.dil ko choo gai.badhaai sweekaren.



    please visit my blog.thanks.

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  21. भावुक कर देने वाली अभिव्यक्ति...

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  22. भावपूर्ण मर्मस्पर्शी प्रस्तुति....जो हमे मां की याद दिलागयी

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