रविवार, 24 अप्रैल 2011

अच्छा लगता है ........

अच्छा लगता है ....
जब जाते-जाते रुक जाते हो 
देखते हो गेट बंद कर 
मेरा अन्दर जाना .......
मेरे कहीं जाने पर
ओझल हो जाने तक 
मुझको देखते रह जाना  .......
मेरी खामोशी पर 
तलाशना औ बुला लाना 
मेरी आवाज़ की खनक .......
मेरे चेहरे की शिकन 
मिटाने अपने वजूद के 
एहसासों की तपिश देना .......
उलझनों में घिर जाने पे 
फैला देना नयी उम्मीदों का 
नव सृजन का आसमान ........
तुमसे ही तो पल्लवित 
और प्रमुदित रहता 
मेरे मन का शिशु-भाव..... 
शायद नहीं निस्संदेह 
तुम ही तो हो मेरी  
हर राह की मंजिल........
                  -निवेदिता 
  





20 टिप्‍पणियां:

  1. पूरी कविता लगातार पढते रहने को बाध्य करती है.
    एक दूसरे को इसी तरह समझना ही तो प्यार है.

    सादर

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  2. अक्सर ऐसा होता है जीवन में , किसी का यूँ अपनेपन से मात्र देखना भर भी मन के शिशु भाव को जीवित रखता है। प्रफुल्लित और उल्लासयुक्त रखता है।

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  3. बहुत प्यारी भावपूर्ण अभिव्यक्ति...

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  4. छोटी छोटी बातें,
    जीवन स्वस्थ बिता दें।

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  5. sunder ehsaas jeevan mahka dete hain ....!!
    sakaratmak lekhan ke liye badhai ....

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  6. bahut khoob likha aapane
    really nice poem
    check out mine
    http://iamhereonlyforu.blogspot.com/

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  7. बहुत ही प्यारी सी कविता ... अच्छा लगा पढना....

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  8. बहुत गहराई से आपने बहुत भावपूर्ण पंक्तियाँ लिखी हैं
    मेरी नयी पोस्ट
    मिलिए हमारी गली के गधे से

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  9. बहुत कोमल अहसास ....बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति

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  10. बहुत प्यारी भावपूर्ण अभिव्यक्ति

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  11. ehsaas ko samete badhiya rachna........rachnakaar bahut badhiya..........aur prerna to aur badhiya...........
    "lucky guy Amitjee"

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  12. बहुत ही प्यारी कविता ***सुन्दर अभिव्यक्ति***

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  13. बहुत अच्छी प्रस्तुति संवेदनशील हृदयस्पर्शी मन के भावों को बहुत गहराई से लिखा है

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  14. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति ..अच्छा लगता है
    फैला देना नयी उम्मीदों का
    नव सृजन का आसमान ........

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  15. उलझनों में घिर जाने पे
    फैला देना नयी उम्मीदों का
    नव सृजन का आसमान
    तुमसे ही तो पल्लवित
    और प्रमुदित रहता
    मेरे मन का शिशु-भाव
    bhut khub 2 bhut khub2 bhut khub2

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  16. मेरे कहीं जाने पर
    ओझल हो जाने तक
    मुझको देखते रह जाना
    prempurn lamhe ko darshati panktiya,
    behad sundar aur bhawpurn rachna.

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