शनिवार, 9 अप्रैल 2011

रंग यूं तो बहुत भरे ...........

रंग यूँ तो बहुत भरे जीवन में 
कुछ हलके कुछ चमकीले 
यूँ ही रंग-रंगीले औ सजीले
कभी नमी पा बिखर जाते 
कभी मन , कभी नयनों से 
आ-आ कर  छलक जाते 
मीठी यादें बन लबों पर 
मंद-मंद स्मित लहरा जाते 
सलोनी यादें ,वो नन्हे कदम 
खुली पलकों सपन दिखा जाते 
वो ठुमकते पांवों में आती दृढ़ता 
वो चमकते नयनों में झांकता 
इन्द्रधनुषी गगन हो कर मगन 
सुनहले-सजीले रंगों का मंद-मधुर 
जीवन-तार सजा जाते ...........
इन्द्रधनुष को और अधिक 
इन्द्रधनुषी बना जाते ..........
रंगों को और अधिक रंगीन बना जाते .......
                                            -निवेदिता 

10 टिप्‍पणियां:

  1. ये रंग यूँ ही बिखरे रहें ..सुन्दर रचना .

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  2. वाह! कविता में जीवन के रंग खूबसूरती से उड़ेल दिये गये हैं।

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  3. कुछ तो है इस कविता में, जो मन को छू गयी।

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  4. रंग सा बिखर गया हर ओर...
    सुन्दर !

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