बुधवार, 13 अप्रैल 2011

हमारे घर की छत पर ..........

हमारे घर की छत पर 
पंछी के जोड़े ने बसाया 
एक प्यारा सा घोंसला !
जिस दिन चिड़ी-चिड़े को
मिला अण्डों रूपी वरदान ,
चिड़े को जाना पडा छोड़ 
घोंसले की सुखद छाँव !
चिड़ी सजगता से सन्नद्ध 
आ पहुँची सहेजने उन
प्राणों से प्यारे अण्डों को  !
इक दिन सुनी आवाज़ 
खुशी से चहचहाने की .......
चिड़ी ने सुनी आहट ,
उन अण्डों में जीवन 
ऊर्जा आ जाने की !
कैसे ठुमकता -मचलता सा
समय आगे बढ़ता चला 
कब किसी को आभास मिला !
चिड़ी की चोंच से 
दाना चुगते-चुगते ,
उन नन्हे पंखों में भी 
इक आस जगी 
दुनिया देख आने की .....
चिड़ी ने भी माँ का था 
फ़र्ज़ निभाया ,उड़ना सिखलाया,
सीखते-सीखते अचानक 
नन्हें दूर गगन में उड़ चले ,
खोजने नित-नयी पहचान !
कभी कहीं दिख जाए कोई ....
चुनौती देती आकाश-गंगा !
चिड़ी मन ही मन मुदित होती 
सोच न पायी अपना आने वाला 
नित बढ़ता जाता रीतापन !
शायद यही है जीवन-चक्र ,
चिड़ी ने अपनी माँ को छोड़ 
खोजी इक नयी पहचान ,
समा गयी अपने आसमान में !
रीतापन कहते किसको ...........
अब  जान गयी-पहचान गयी  
उन नन्हे पंखों की परवाज़ ,
जीवन का दर्शन समझा गयी .........
                   -निवेदिता  


12 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही खूबसूरत रचना,
    ......दुर्गाष्टमी और रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएं।

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  2. अब जान गयी-पहचान गयी
    उन नन्हे पंखों की परवाज़ ,
    जीवन का दर्शन समझा गयी .......
    क्या बात है ....!
    बहुत बढ़िया लाइने हैं यह ! शुभकामनायें आपको !!

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  3. जीवन पल्लवित होते देखना कितना अच्छा लगता है।

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  4. हमारे घर की छत पर
    पंछी के जोड़े ने बसाया
    एक प्यारा सा घोंसला !
    जिस दिन चिड़ी-चिड़े को
    मिला अण्डों रूपी वरदान ,
    चिड़े को जाना पडा छोड़
    घोंसले की सुखद छाँव !
    चिड़ी सजगता से सन्नद्ध
    आ पहुँची सहेजने उन
    प्राणों से प्यारे अण्डों को !
    बहुत ही सुंदर विचारों और भावनाओं को समेटती कविता बधाई और शुभकामनाएं |

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  5. इस ब्लॉग की डिजाइन भी अलग और खूबसूरत है |

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  6. बहुत सुंदर भावपूर्ण कविता |बधाई
    आशा

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  7. सुन्दर अभिव्यक्ति , अच्छे लेखन के लिए धन्यवाद
    http://www.avaneesh99.blogspot.com/

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