शुक्रवार, 15 अप्रैल 2011

अनपेक्षित उपेक्षा या उपेक्षित अपेक्षा .......








अनपेक्षित उपेक्षा या उपेक्षित अपेक्षा
देखा तो अक्षरों ने थी 
थोड़ी जगह बदली
करते गए अर्थ का 
यूं ही अनर्थ ............
बदलना ही था जरूरी (तो)
शब्दों ने बदलना था स्थान
ऐसे अर्श को फर्श औ 
फर्श को अर्श में न बदलना पड़ता
अपेक्षाओं को झेलनी पडी उपेक्षा 
उपेक्षा भी बन गयी अनपेक्षित ...
शायद ऐसे ही समझा हो उपेक्षा ने 
कैसा लगता है यूं उपेक्षित होना !
शायद जरूरी था आइना दिखाना .......
                                  -निवेदिता 

21 टिप्‍पणियां:

  1. उपेक्षा और अपेक्षा दोनों शब्दों का अच्छा विश्लेषण

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  2. उपेक्षा भी बन गयी अनपेक्षित ...
    शायद ऐसे ही समझा हो उपेक्षा ने
    कैसा लगता है यूं उपेक्षित होना !
    शायद जरूरी था आइना दिखाना .......adbhut vyakhyaa

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  3. बहुत अच्छा लिखा है आपने.
    ब्लॉग की नयी थीम भी आकर्षक है.

    सादर

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  4. अनपेक्षित उपेक्षा या उपेक्षित अपेक्षा
    देखा तो अक्षरों ने थी
    थोड़ी जगह बदली
    करते गए अर्थ का
    यूं ही अनर्थ ............
    निवेदिता जी सुंदर और गहरे भावार्थ वाली कविता बधाई |

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  5. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (16.04.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
    चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

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  6. आदरणीय निवेदिता जी
    नमस्कार !
    .........सुन्दर रचना

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  7. Bahut khubsurat baat bari asaani se kah di aapne Nivedita.Nukte ke her fer se khuda zuda ho jata hai...chinta se agar bindu hat jaaye to chita ho jati hai...usi tarah apeksha aur upeksha par aapki kavyatmak tippni jeevant lagi. Badhayi.

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  8. शब्दों में अक्षरों के इधर उधर होने से अर्थ का अनर्थ.....
    ऐसे ही सोच में ज़रा सा इधर का उधर....और सब घचाम्म्पच्च....
    अच्छा लेखन

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  9. स्थान बदलते ही अर्थ और सन्दर्भ दोनो बदल जाते हैं और साथ ही उनका प्रभाव भी बदल जाता है ! बहुत गहन रचना ! बधाई !

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  10. उपेक्षा और अपेक्षा.
    Good analysis between the two.

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  11. बेहद सुन्दर रचना.........
    शुभकामनाओं सहित....
    बधाई.....

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  12. एक आदर्श तुलनात्मक अध्यन प्रस्तुत किया है,अच्छा है.

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  13. अनपेक्षित उपेक्षा या उपेक्षित अपेक्षा
    देखा तो अक्षरों ने थी
    थोड़ी जगह बदली
    करते गए अर्थ का
    यूं ही अनर्थ ............
    sundar rachna

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  14. तस्वीर बहुत कुछ कह रही है !

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  15. शब्दों ने बदलना था स्थान
    ऐसे अर्श को फर्श औ
    फर्श को अर्श में न बदलना पड़ता
    अपेक्षाओं को झेलनी पडी उपेक्षा ...

    उम्दा प्रस्तुति ...
    सुन्दर अभिव्यक्ति.

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  16. आपके ब्लॉग पर पहली बार आना हुआ.बहुत अच्छा लगा आपकी
    चतुराईपूर्ण सुन्दर अभिव्यक्ति को पढ़ कर.दिल से आभार.
    मेरे ब्लॉग 'मनसा वाचा कर्मणा' पर आपका स्वागत है.रामजन्म पर आपको सादर बुलावा है.रामजन्म-आध्यात्मिक चिंतन -१ मेरी नई पोस्ट है.

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  17. आप सब विद्वजनों ने मेरी अपेक्षाओं की उपेक्षा नहीं की और सराहना दी ,इसके लिये आभारी हूं .....

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