गुरुवार, 12 मई 2011

हाथों में ले कर हाथ .................

जीवन की ऊष्मा से 
भर जाते मन प्राण,
जब भी लहरा जाते 
यादों की करते झंकार, 
हाथो में ले कर हाथ 
श्वासों से लिखा
तुमने बस प्यार ...........
धूप-छाँव सी बसर 
होती जाती ज़िन्दगी,
कभी तीखी कभी कसैली 
उलझती सुलझन सी, 
पल्लवित सुरभित सुमन सी 
पा कर बादल सी छाँव
जीने काबिल हो जाती है  
ये हसीं ज़िन्दगी .................. 
                                                                                                          -निवेदिता 


13 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही सुंदर कविता निवेदिता जी

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  2. बहुत सुन्दर रचना| धन्यवाद|

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  3. स्पर्श के माध्यम से न जाने कितने भाव संचारित हो जाते हैं।

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  4. इस कविता को दो दिन पहले पोस्ट किया था ,ब्लागर की समस्या की वजह से पोस्ट गायब हो गयी थी ...अब वापस मिलने पर टिप्पणियां गायब हो गयी हैं .....

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  5. .

    Nivedita ji , you can retrieve the comments from your mail box and re-paste them here again .

    Beautiful creation !

    .

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