शनिवार, 30 जुलाई 2011

डायबिटीज .........


मिठास सबको बहुत भाती है ,चाहे वो रिश्तों में हो अथवा सोच में | कोई भी खुशी हो और माहौल उत्स्वित हो रहा हो ,बस तुरंत मीठे की याद आती है | साधारण परिस्थितियों में हम मिठास को 
बनाये रखना चाहते हैं | परन्तु ये मिठास डरा भी जाती है ,जब वो रक्त में अनुपात बिगाड़ कर बढ़ 
जाती है और डायबिटीज़ का नाम ले लेती है | बस इस का नाम सुनते ही मीठे से दूरी बढ़ने लगती 
है और क्या खाएं अथवा क्या न खाएं ये सोचने लगते हैं |

डायबिटीज का नाम सुनते ही कई आशंकायें सर उठाने लगती हैं ,सबसे पहले इसके कारण को 
जानने की कोशिश करते हैं | पहले की मान्यता के अनुसार डायबिटीज अनुवांशिक कारणों से 
होती थी ,अर्थात अगर परिवार में पहले किसी को डायबिटीज होती थी तो उस की अगली पीढी 
के किसी सदस्य को होती थी | परन्तु अब डाक्टर मानते हैं की अनुवांशिक कारणों से अधिक 
जिम्मेदार अस्त-व्यस्त जीवन शैली है | समय से खाना न खाना ,ज्यादातर बाहर का खाना खा 
लेना ,जंक फ़ूड को अपनाते जाना जैसी अव्यवस्थित जीवन-चर्या बना लेने से शरीर आंतरिक 
और वाह्य दोनों ही रूप से प्रभावित होता है | मोटापा भी इसमें प्रमुख कारक बन जाता है | 

डायबिटीज के दायरे में आ चुके हैं इसके कुछ लक्षण हैं ,जो ज़रा सा ध्यान देने से ही पता चल जाता 
है | इसके रोगी को प्यास बहुत लगती है और भूख कम होती जाती है | मीठा खाने की तलब लगती 
है रक्त शर्करा की मात्रा अधिक होने से देखने की क्षमता भी प्रभावित होती है | थकान जल्दी लगती 
है |कहीं चोट लग  जाने पर ,घाव जल्दी नहीं भरते हैं | इन्फेक्शन भी जल्दी होते हैं |डायबिटीज का शिकार हम हो चुके हैं ,इस का पता तो रक्त की जाँच से पता चलता है | ये जाँच दो तरह से होती है  ......... पहली खाली पेट और दूसरी खाने के दो घण्टे बाद |

डायबिटीज से बचाव संभव है ,बस थोड़ी सी सावधानी और संयम बरतने की जरूरत है | सबसे पहले एक नियमित जीवन शैली की आदत डालें | समय पर संतुलित भोजन लें और नींद के भी समय  का भी ध्यान रखें | शारीरिक परिश्रम अथवा व्यायाम करने को अपने जीवन का हिस्सा बना लें | 
समय पर डाक्टर की सलाह के अनुसार जाँच भी करायें |


डायबिटीज अपने-आप में बहुत घातक न होते हुए भी ,अन्य बीमारियों से स्वस्थ होने में अवरोधक 
का काम करती है ,इसलिए इससे सचेत रहने की आवश्यकता है ! 

15 टिप्‍पणियां:

  1. प्रेम की मठास से भी डायबिटीज़ हो जाती है कभी कभी।

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 01-08-2011 को चर्चामंच http://charchamanch.blogspot.com/ पर सोमवासरीय चर्चा में भी होगी। सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  3. मिठास रिश्ते में हो या खाने में ... ज़्यादा होने पर डरा ही देती है...
    नियमित सैर और नियमित मुस्कान हो तो इस रोग से बचा जा सकता है :)

    उत्तर देंहटाएं
  4. ज्यादा मिठास कभी अच्छी नहीं होती |अपने सक्षेप में डाइबिटीज पर अच्छी जानकारी दी है |सारगर्भित लेख |
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  5. dibites zindagi khatam karti hai
    zindagi mithas ke bina chalti nahi hai
    jab aage gaddha peeche khai ke chakar mein fas jayenge
    tab ..tab to ham meetha hi khayenge....atyant jankar purn lekh..hardi dhnyawad

    उत्तर देंहटाएं