मंगलवार, 12 जुलाई 2011

सन्तुलन और तनाव ..........

     दबाव का संतुलन और इसका तनाव दोनों एकदम  विपरीत स्थितियाँ हैं | रोजमर्रा के नियमित काम हम अभ्यास के फलस्वरूप सहजता से करते जाते हैं |बेशक अकसर काम कठिन भी होते हैं और हमारी इच्छा  के विपरीत भी पर सहजता से सुचारू रूप से परिपूर्ण हो जाते हैं |इसके विपरीत अपेक्षाकृत सरल काम अचानक से आ जाने पर भी मस्तिष्क काम को करने के दबाव में आ कर असहज हो जाता है और उसकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है |  इसका सबसे आसान उदाहरण है कि कोई बहुत ही तेज़ गति से दौड़ रहा हो ,जो कि
श्रमसाध्य कार्य है ,वो थक रहा होगा तब भी संतुलन बना कर दौड़ता रहता है ,अगर अचानक उस को रोक दिया जाए तो वो या तो गिर जाता है या फिर लड़खड़ा जाता है | हमारे अचेतन या अवचेतन अवस्था में मस्तिष्क में जो संजो दिया जाता है उसको करना आसान लगता है |जब हम परेशान होते हैं तब हमारा व्यवहार एकदम अलग हो जाता है हम संतुलन खो बैठते हैं और दबाव का तनाव स्पष्ट दिखाई देता है |हमारा मस्तिष्क इस दबाव का सामना करने में लगभग आधी शक्ति लगा देता है | अब मानी हुई बात है कि आधी शक्ति से किया गया काम और उसका परिणाम संतुलित नहीं होगा |
             इस दबाव के तनाव का असर हम अपने पर कितना पड़ने देते हैं ,ये सिर्फ हम ही तय कर सकते हैं |इस का सामना करने के लिए हमें सिर्फ एक काम करना है कि अपने मस्तिष्क का संतुलन बनाए रखना है ,क्योंकि तनाव का असर तो ह्रदय पर पड़ता है पर इससे निकालने की क्षमता तो सिर्फ संतुलित मास्तिष्क में ही होती है |यह भी सच है कि जब तक हम जीवित रहेंगे ,कितने भी शिथिल पड़ जाएँ ,मस्तिष्क काम करना बंद नहीं करता और वो कई बातें सोचता रहेगा |इसका तात्पर्य है कि दबाव से बच नहीं सकते ,तो इस दबाव को संतुलित करने का प्रयास करते रहना चाहिए और जीवन में आने वाली छोटी - बड़ी खुशियाँ महसूस करते हुए ,ह्रदय और मस्तिष्क दोनों को पुष्ट रखना चाहिए जिससे वो संतुलित हो कर दबाव का सामना कर सकें |
                                                                                                                              -निवेदिता 
                                                                                                                               
            

16 टिप्‍पणियां:

  1. दबाव में गलतियाँ और भी ज्यादा होती हैं... सच है संतुलन ज़रूरी है...

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  2. बहुत ज़रूरी है जीवन में संतुलन बनाए रखना। हर क्षेत्र में।

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  3. संतुलन हो तो दबाव झेल लिया जाता है ...अच्छा लेख

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  4. दबाव को संतुलित करने का प्रयास करते रहना चाहिए और जीवन में आने वाली छोटी - बड़ी खुशियाँ महसूस करते हुए ,ह्रदय और मस्तिष्क दोनों को पुष्ट रखना चाहिए

    जीवन में संतुलन ज़रूरी

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  5. बहुत सच कहा आपने, किसी भी घटना को भिन्न भिन्न तरीकों से लेना ही व्यक्तित्वों की भिन्नता दिखाता है।

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  6. बड़े काम की बातें बताईं आपने.

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  7. बिलकुल सही कहा आपने जिन्दगी में हर हालत में संतुलन होना बहुत जरुरी है...

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  8. जहाँ संतुलन होगा वहा तनाव होने के आसार कम ही होते है
    बदिया जानकारी

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  9. सही कहा आपने संतुलन का होना बहुत ज़रूरी है.

    सादर

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  10. I agree everything depend on us :)
    and proper control and cordination is must to live a healthy life.

    Nice read !!

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  11. संतुलन ही जीवन का मंत्र है ..............

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  12. बहुत सच कहा है..जीवन में मानसिक संतुलन बनाए रखना बहुत ज़रूरी है..

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  13. आपकी प्रवि्ष्टी की चर्चा कल बुधवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल उद्देश्य से दी जा रही है!

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