सोमवार, 24 सितंबर 2012

उम्र की दस्तक ......


हमारी पहली श्वांस से ही उम्र अपनी दस्तक देना शुरू कर देती है ,पर हम अनजान सा बने उसको अनदेखा कर जाते हैं | ज़िन्दगी के प्रारंभिक पल सिर्फ खुशियाँ और व्यस्तता बरसाते रहते हैं | कुछ उम्र का अल्हड़पन , कुछ विचारों की तीव्रतम गति किसी लम्हे पर ठिठक कर नित नई  उलझनें  देती श्वासों को थामने का मौक़ा ही नहीं देते | ये वो दौर होता है जब हर मंजिल अपनी पहुँच में और हर कठिनाई आसान प्रतीत होती है | असफलता ,तो हमें लगता है सफलता का पहला सोपान है | कोई  भी दुःख अथवा  कष्ट , कभी  लगता  ही  नहीं कि हमारे जीवन में भी आ सकता है | पर वास्तव में उम्र का सत्य हर कदम पर अपना एहसास कराता रहता है |

आने वाली हर श्वांस उम्र के एक लम्हे के पूर्ण हो चुकने का आभास देती है | आगे बढ़ता हुआ हर क़दम जीवन यात्रा की पूर्णता की तरफ  इंगित करता है | लगता है जैसे एक दायरा पूरा हो चला ! अबोधावस्था से क्रमिक ज्ञान की तरफ जाती चेतना परम की तरफ ले जाती है | जैसे - जैसे उलझनें बढती हैं सरल मन भी छल और कपट को समझने लगता है | इसको ही तथाकथित सामाजिकता और समझदारी मान लिया जाता है | 

नित बढती शक्ति और सामर्थ्य के मद में ,समस्त संसार को नश्वर और खुद को प्रबल मानने की छलनामयी भूल कर जाता है | पर यहाँ भी उम्र अपनी दस्तक से  उसको सचेत करने का प्रयास करती है | कभी नेत्रों की ज्योति कमजोर होने लगती है , तो  कभी बढ़ते कदमों की दृढ़ता लड़खड़ाने लगती है | कभी केशों में सफेदी दस्तक देती  है , तो कभी वाणी की स्पष्टता धूमिल हो जाती है | बढती  आयु  अपना एहसास कुछ  ऐसा दिलाती है कि हम पूरा शरीर न रह कर , कष्ट के अनुसार विभिन्न अंगों में बँट जाते हैं और उस पीड़ा से मुक्ति की कामना में चिकित्सक  के द्वार पहुँचने लगते हैं | पर तब भी सहजता से बढती उम्र का स्वागत न करके अफ़सोस के साए में गुम हो जाते हैं | कितना भी जीवन गुज़र गया हो ,जीना नहीं सीख पाते | 

बढती उम्र  की  दस्तक तो एक धूम्र - रेखा सी होती है , एकदम हल्की सी झलक कर शीघ्रता से ओझल हो जाने वाली | सही समय पर इस को समझ लिया जाए और अपने आचरण को सुधार लें तो कोई पछतावा नही होगा | इसके लिए हमको बस हर लम्हे का सम्मान करना आना चाहिए | अन्यथा समय निकल जाने के बाद पश्चात्ताप करना तो आसान ही है !
                                -निवेदिता 

15 टिप्‍पणियां:

  1. जो भी है... बस एक यही पल है ...

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    1. सच कहा शिखा ,पर क्या करें आने वाला पल जाने वाला है .....-:)

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    2. इसलिए हर पल यहाँ जी भर जियो, क्यूंकि जो आज है क्या पता कल हो ना हो... :-)

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  2. अर्रे.............डराओ मत..........
    डेट ऑफ बर्थ याद दिला दी.......
    :-(

    सस्नेह
    अनु

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  3. उम्र की दस्तकें आगाह करती हैं, और हम बचपन के झूले में पींगे भरते अनदेखा करते जाते हैं, तभी घुटना मुचकता है- आह !

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  4. मुझे तो दर्पण डराता था लेकिन अब वो मुझसे डरने लगा है मैंने उसकी आँखों में आंखे डालना सीख लिया है.

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  5. हम हो खाली हो आने वाले समय से स्वयं को भरते रहते हैं, बीते से क्या दिल लगाना?

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  6. हमारी पहली श्वांस से ही उम्र अपनी दस्तक देना शुरू कर देती है.............पहले वाक्य ने ही बहुत प्रभावित किया.
    पूरा पढ़ गया.बहुत सुन्दर तरीक़े से लिखा है आपने.

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  7. उम्र के हर पड़ाव में समझोता और तालमेल से ही जीवन सही ढंग से चल सकता हैं ...बहुत बढिया लेख :)))

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  8. सही कहा, समय चूकि पुनि का पछतानी।

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  9. उम्र तो अपना असर दिखाती ही है , समझे ना समझे !

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