रविवार, 16 सितंबर 2012

ट्रैफिक सिग्नल सी ज़िन्दगी .......


ट्रैफिक सिग्नल सी 
टिक गयी हूँ 
ज़िन्दगी के उलझे 
चौरस्ते पर 
जब किसी की 
गति की तीव्रता को 
थामना चाहा 
तनी हुई भौंहों की 
सौगात मिली 
पर हाँ ! ये अनदेखा 
कैसे कर जाती 
सहज करती राहों पर 
बढती गति , स्मित 
बरसा मुदित सा कर जाती 
गति की तीव्रता में 
रहती है भिन्नता पर 
चौराहे को यथावत छोड़ 
कभी हास तो कभी आक्रोश बरसा 
अपनी मंजिल को बढ़ ही जाते हैं 
वो चौराहा और उसका सिग्नल 
दोनों ही एक सा ठिठक 
निहारते रह जाते  हैं 
बस पूर्ण करने 
एक दूजे के अस्तित्व को .....
                                 -निवेदिता 

18 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस ख़ूबसूरत प्रविष्टि को आज दिनांक 17-09-2012 को ट्रैफिक सिग्नल सी ज़िन्दगी : सोमवारीय चर्चामंच-1005 पर लिंक किया जा रहा है। सादर सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  2. सार्थक सृजन , बधाई.

    कृपया मेरे ब्लॉग"meri kavitayen" की नवीनतम पोस्ट पर भी पधारें , आभारी होऊंगा.

    उत्तर देंहटाएं
  3. चौराहा और सिग्नल गति को विराम देते हैं कुछ पल के लिए ही सही !

    उत्तर देंहटाएं
  4. ट्रैफिक .सिग्नल थोड़ी देर के लिए ही सही, नियंता तो होते ही है.

    उत्तर देंहटाएं
  5. कम से कम अगले चौराहों तक तो निश्चिन्त बढ़ सकते हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  6. ट्रैफिक सिग्नल की तरह चौरस्ते पर रूकना तो भयावह है। आनंद तो चलते रहने में ही है। एक समय आता है जिंदगी में जब जिंदगी ठहर सी जाती है। शायद कठिन, बहुत कठिन होते होंगे ये पल।

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत बढ़िया प्रस्तुति गति को नई उर्जा पाने के लिए क्षणिक विराम भी जरूरी है

    उत्तर देंहटाएं
  8. रुक कर चलना , चल कर रुकना ..शायद यही जीवन है. और ये ट्रेफिक सिग्नल जिंदगी ही दर्शा गए.

    उत्तर देंहटाएं
  9. हर किसी की जिंदगी में एक वक्त ऐसा आता ही हैं .........खूबसूरत प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  10. हर किसी को चाहिए अब एक ट्रेफिक सिग्नल जहां गति को क्षणिक विराम लगे ,देख भाल के जाए किधर जाना है हर आदमी ....बढिया प्रस्तुति .

    उत्तर देंहटाएं
  11. आज का यह दिन कल बन जायेगा कल पीछे मुड़ के ना देख प्यारे आगे चल...शायद ट्राफिक सिंगल भी ज़िंदगी को यही संदेश देते हैं

    उत्तर देंहटाएं
  12. जिंदगी में हर इंसान के एक बार तो ऐसी स्थिति आती ही है ।

    उत्तर देंहटाएं
  13. गति की तीव्रता में
    रहती है भिन्नता पर
    चौराहे को यथावत छोड़
    कभी हास तो कभी आक्रोश बरसा
    अपनी मंजिल को बढ़ ही जाते हैं
    bahut sundar jeevant rachana ...badhai Nivedita ji

    उत्तर देंहटाएं
  14. कभी कभी ये जीवन भी उस चौराहे की तरह ही मुलता है ... जहाँ सिग्नल भी काम नहीं करते ...

    उत्तर देंहटाएं