रविवार, 7 अगस्त 2011

मन बावरा ........


मन का रीतापन 
नयनों में बस गया 
शायद इसीलिये 
अश्रुओं ने इक 
बसेरा नया ढूँढ लिया !
रातों की कालिमा 
काजल सी नयनों में 
सपना बन छा गयी ,
टूटते तारों से सपने ,
चुभन दे जाते 
मन के छालों सा 
नित उगते 
सूरज की लाली 
दावानल बन सब 
भस्मीभूत कर जाती !
तुला की धुरी सा   
लचकता मन 
संतुलन साधने में 
डूबता गया 
आशाओं उम्मीदों के 
बाट रखे मन बावरा 
डगमगाता रहा ........
               -निवेदिता 

26 टिप्‍पणियां:

  1. मन, न जाने कहाँ से कहाँ ले जाता है जीवन की डगरिया।

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  2. आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 08-08-2011 को चर्चामंच http://charchamanch.blogspot.com/ पर सोमवासरीय चर्चा में भी होगी। सूचनार्थ

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  3. मन......तू बाबरा ना होता,तो क्या होता.....

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  4. संतुलन साधने में
    डूबता गया
    आशाओं उम्मीदों के
    बाट रखे मन बावरा
    डगमगाता रहा ........
    sundar shabd chayan ,sarthak prayas ,sarhniya
    hai /

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  5. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति मन की ....

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  6. मन की मत पे मत चलियो, ये जीते जी मरवा देगा.... बहुत ही सुन्दर रचना....

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  7. इसे पढ़कर ऐसा लगा मानों कवयित्री की अनुभूति, सोच, स्मृति और स्‍वप्‍न सब मिलकर काव्‍य का रूप धारण कर लिया हो। मान और विचार कहीं ऊपर से चिपकाए नहीं लगते।

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  8. काश मन को समझा पाते ....शुभकामनायें !

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  9. बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।

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  10. बहुत ही अच्छी रचना .. दिल को छूती हुई .. काश ...!!! ये मन भी बड़ा अजीब है ..

    आभार
    विजय

    कृपया मेरी नयी कविता " फूल, चाय और बारिश " को पढकर अपनी बहुमूल्य राय दिजियेंगा . लिंक है : http://poemsofvijay.blogspot.com/2011/07/blog-post_22.html

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  11. वाह! सुन्दर अभिव्यक्ति...
    सादर..

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  12. बहत ही सुन्दर अभिव्यक्ति ....

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  13. मन की कश्मकश को सार्थक शब्द देती अच्छी प्रस्तुति

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  14. man ke bawarepan per likhi anoothi rachanaa.badhaai aapko.
    happy friendship day.

    "ब्लोगर्स मीट वीकली {३}" के मंच पर सभी ब्लोगर्स को जोड़ने के लिए एक प्रयास किया गया है /आप वहां आइये और अपने विचारों से हमें अवगत कराइये/हमारी कामना है कि आप हिंदी की सेवा यूं ही करते रहें। सोमवार ०८/०८/११ को
    ब्लॉगर्स मीट वीकली में आप सादर आमंत्रित हैं।

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  15. मन बावरा कैसे भटकता है ....
    सुन्दर !

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  16. bahut suder bhav liye saarthak prastuti.badhaai sweekaren.

    "ब्लोगर्स मीट वीकली {३}" के मंच पर सभी ब्लोगर्स को जोड़ने के लिए एक प्रयास किया गया है /आप वहां आइये और अपने विचारों से हमें अवगत कराइये/हमारी कामना है कि आप हिंदी की सेवा यूं ही करते रहें। सोमवार ०८/०८/११ को
    ब्लॉगर्स मीट वीकली में आप सादर आमंत्रित हैं।

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  17. बहुत खूबसूरत अंदाज़ में पेश की गई है पोस्ट......मित्रता दिवस की शुभकामनायें।

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  18. एक बार फिर निवेदिता जी खूबसूरत कृति के लिए बधाई . मन कसमसाहट को उकेरती रचना

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  19. तुला की धुरी सा
    लचकता मन
    संतुलन साधने में
    डूबता गया
    आशाओं उम्मीदों के
    बाट रखे मन बावरा
    डगमगाता रहा ........

    अति सुन्दर बात कही आपने

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  20. मन की माने कौन ... और मन भी तो भटकता रहता है इधर उधर ...

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