गुरुवार, 31 मार्च 2011

गुमसुम खामोशी ........

इस गुमसुम खामोशी में 
ख्यालों की आंधियां लाते
अनसुलझे सवालों में 
धूपिल छाँव तलाशते
कैसे हैं ये जज्बात !
कभी पानी सा सरल 
कभी पानी सा कठोर,
धूमिल पगडंडी से 
धुंधलाते जाते रास्ते ,
कभी जुगनू सी चमक 
कभी बिजली की कडक,
कभी मील के पत्थर बन 
राहें सरल कर जाती ,
कभी गहराइयों में ढकेलती
खाइयों में दफ़न कर जाती ,
ये कैसी आवाज़ है दम घोंटती 
सुन कर भी अनसुनी ही करती .......
                        -निवेदिता    

25 टिप्‍पणियां:

  1. खामोशी को बहुत ही अच्छे शब्द दिए हैं आपने.

    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  2. गुमसुम खामोशी में
    ख्यालों की आंधियां लाते
    अनसुलझे सवालों में
    धूपिल छाँव तलाशते
    कैसे हैं ये जज्बात !
    khamoshi me umadte jazbaaton kee aandhi bahut kuch de jati hai

    उत्तर देंहटाएं
  3. वाह! बहुत बेहतरीन रचना| धन्यवाद|

    उत्तर देंहटाएं
  4. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (2.04.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
    चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

    उत्तर देंहटाएं
  5. मौन करे नद-नाद,
    कहीं छलका है महा विषाद।

    उत्तर देंहटाएं
  6. खामोशी के जज़्बात -
    पर करते सुंदर बात ....!!

    उत्तर देंहटाएं
  7. धूमिल पगडंडी से
    धुंधलाते जाते रास्ते ,
    कभी जुगनू सी चमक
    कभी बिजली की कडक,
    कभी मील के पत्थर बन
    राहें सरल कर जाती ,

    बेहतरीन रचना

    उत्तर देंहटाएं
  8. कभी गहराइयों में ढकेलती
    खाइयों में दफ़न कर जाती ,
    ये कैसी आवाज़ है दम घोंटती
    सुन कर भी अनसुनी ही करती

    बेहतरीन भाव......

    उत्तर देंहटाएं
  9. कभी पानी सा सरल
    कभी पानी सा कठोर,

    बहुत खूब ...अच्छी रचना

    उत्तर देंहटाएं
  10. जज़्बातो की भाषा कब समझ आती है………सुन्दर अभिव्यक्ति।

    उत्तर देंहटाएं
  11. gahara bhav...sundar
    http://kavyana.blogspot.com/2011/02/blog-post.html

    उत्तर देंहटाएं
  12. आप सबका उत्साहवर्धन के लिये आभार .......

    उत्तर देंहटाएं
  13. इस गुमसुम खामोशी में
    ख्यालों की आंधियां लाते
    अनसुलझे सवालों में
    धूपिल छाँव तलाशते
    कैसे हैं ये जज्बात !...

    बहुत सुन्दर एवं मर्मस्पर्शी रचना !
    शुभकामनायें !

    उत्तर देंहटाएं
  14. very nice creation really it is !!!
    to research ur Raam..visit now ---
    www.susstheraam.blogspot.com, www.theraam.weebly.com

    उत्तर देंहटाएं
  15. अनसुलझे सवालों में
    धूपिल छाँव तलाशते
    कैसे हैं ये जज्बात !

    सार्थक सुन्दर रचना....
    सादर.

    उत्तर देंहटाएं
  16. मकर संक्रांति की हार्दिक शुभ कामनाएँ।
    ----------------------------
    कल 16/01/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  17. वाह...आपकी ख़ामोशी ने बहुत कुछ कह डाला..
    बहुत खूब.

    उत्तर देंहटाएं