मंगलवार, 29 मार्च 2011

आरक्षण : एक सुझाव मेरा भी

 

      आरक्षण ,सुरक्षित ,रिजर्वेशन -जैसे किसी भी नाम से पुकारें ,तुरंत ही 
विरोध के स्वर भी उठने लगते हैं |कितने आन्दोलन हो चुके ,कुछ हो रहे हैं 
और निकट भविष्य में  कितने होने वाले हैं ये तो अच्छे से अच्छा भविष्य बताने का दावा करने वाले भी नहीं बता सकते |कितने समाधान सुझाए गए 
रास्ते खोजने का प्रयास भी किया गया ,परन्तु परिणाम कुछ नहीं मिला |
ये आरक्षण जातिगत आधार पर ही किये गए हैं और जाति अथवा धर्म एक 
ऐसा मुद्दा है जिसको छेड़ने का साहस मत-लोलुप नेता कभी कर ही नहीं सकते |
      अभी कुछ समय पहले जनगणना के समय जाति आधारित जनगणना 
पर भी विवाद हुआ |इस आरक्षण रूपी दानव का सामना करने के लिए मेरा भी एक सुझाव है |जाति आधारित जनगणना करने के बाद हर जाति का एक अनुपात निकाला लिया जाये और उस अनुपात के आधार पर हर जाति 
के लिए स्थान आरक्षित कर दिया जाये |हर जाति जब आरक्षण के दायरे में 
आ जायेगी तब कोई उसका विरोध करेगा ही नहीं |बेशक ऐसा नियम बनाने 
से सामान्य सीट नहीं बचेगी |परन्तु हमें सामान्य सीट की जरूरत ही क्या है |ऐसा करने से कम से कम कुछ स्थान तो अन्य का भी पक्का हो जाएगा |
जहां स्थान कम हैं ,उस स्थान के लिए सिर्फ उन लोगों को ही विचारयोग्य 
समझा जाये जिनके अपने परिवार से कोई व्यक्ति देश की सेना का अंग रहा हो | इस बहाने  ही  सही  हम  अपने सैनिकों का कुछ तो सम्मान करना भी सीख जायेंगे |इस का सबसे बड़ा लाभ ये है की वो स्थान नेताओं की बपौती नहीं बन पायेगी |
         आरक्षण को या तो एकदम समाप्त कर दिया जाये ,या फिर सबका आरक्षण कर दिया जाये ,क्योंकि किसी भी आधार पर आरक्षण किया जाये 
निष्कलुष तो मौकापरस्त महानुभाव उसे रहने नहीं देंगे और उसका असर 
और लाभ तो होना नहीं है | 
                   निवेदिता

9 टिप्‍पणियां:

  1. आरक्षण को या तो एकदम समाप्त कर दिया जाये ,या फिर सबका आरक्षण कर दिया जाये ,क्योंकि किसी भी आधार पर आरक्षण किया जाये
    निष्कलुष तो मौकापरस्त महानुभाव उसे रहने नहीं देंगे और उसका असर
    और लाभ तो होना नहीं है | sahmat hun

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  2. आपके सुझाव से मैं भी सहमत हूँ.

    सादर

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  3. सच कहा आपने, आरक्षण का लाभ उनको नहीं मिल रहा है जिनको मिलना चाहिये, राजनीति हो रही है बस।

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  4. आपकी बात में बहुत दम है...काश हमारे निति संचालक इसे पढ़ कर कुछ समझें...

    नीरज

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  5. आरक्षण को समाप्त करना ही एकमात्र उपाय है .. इसके बजाए शिक्षा का खर्च देना चाहिए ग़रीबों को .... जाती धर्म के नाम पर आरक्षण समाज का कोई भला नही कर रहा न करेगा ...

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  6. आपका लेख विचारणीय है .....बहुत अच्छी बात सुझाई है आपने |

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  7. ये आरक्षण ही तो नेताओं की रोजी रोटी है। कैसे छोड़ दें वो उसे । ये जाति भेद न हो तो तो ये टिकेंगे किस आधार पर ।

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  8. आरक्षण को समाप्त करना ही एकमात्र उपाय है ....विचारणीय लेख

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