गुरुवार, 23 अगस्त 2012

" ट्री गार्ड "


अक्सर मौसम बदलते ही मेरी निगाहें उस मौसम में पनपने वाले नये पौधों की तलाश में रहती हैं | इस बार सोचा कि घर के अंदर के स्थान पर घर के बाहर भी पौधे लगाये जाएँ ,फुटपाथ पर | नाज़ुकमना पौधों को असुरक्षित सडक पर अनदेखा छोड़ने का साहस नहीं कर पा रही थी | ये सडकें तो ऐसी हो गईं हैं कि एक जीता जागता इंसान या कहूँ बेटियों के लिए असुरक्षित ही रहती हैं | पता ही नहीं चलता कि कब कौन सा हाथ दू:शासन बन जाएगा और आते - जाते राहगीर कुरुसभा के दिग्गज महारथी बन असहाय सा दीखते हुए चीर - हरण का वीडियो बनाने में व्यस्त हो जायेंगे | माली से बात की तो उसने सबसे पहले ट्रीगार्ड की मांग की | बड़े ही दार्शनिक अंदाज़ में ट्री गार्ड का फलसफ़ा समझाया कि भले ही बाद में पौधे मजबूत वृक्ष बन जायेंगे पर शुरू में तो उनको एक सुरक्षित परिवेश चाहिये ,जिससे आवारा पशुओं की कृपादृष्टि से वो बच सकें ! 

अल्पशिक्षित माली की बातों को सुन कर ज़िन्दगी का एक बहुत बड़ा सच ,अनायास ही समझ में आ गया | शिशु - जन्म के आभास के साथ ही पूरा परिवार अजन्मे शिशु के लिए एक ट्री गार्ड बन जाता है | ये सिलसिला जन्म के साथ ही पूरा नहीं हो जाता ,अपितु उसके क्रमिक विकास के साथ ही विभिन्न रूप बदल - बदल कर उसके साथ चलता है | ज़िन्दगी में हर कदम पर आनी वाली चुनौतियों के सामने कभी मनोबल बन कर ,तो कभी साथी बन कर उत्तरोत्तर बचाने को प्रयासरत रहता है | मुझे लगता है कि इसका नाम ट्री गार्ड गलत है ,इसको तो अविकसित पौधों की सुरक्षा के लिए लगाया जाता है न कि वृक्ष को सुरक्षित रखने के लिए | 

कभी-कभी ट्री गार्ड की वजह से सिर्फ पौधे ही नहीं बचते ,अपितु राहगीर भी कंटीली डालियों से बच पाते हैं | गुलाब के फूल पहली निगाह में ही आँखों को रोक कर हाथों को बढने को विवश करते हैं उन को तोड़ने के लिए  ,इस क्रिया में अक्सर हाथ काँटों की खरोंच का पारितोषिक भी पा जाता है | पर जब यही पौधा ट्री गार्ड में सुरक्षित होता है ,तो तोड़ने वाले हाथों की निगाहें उन चुभ सकने वाले काँटों को भी देख लेतीं हैं | ऐसे अपराधों के प्रति जागरूकता रखने वाले नागरिक कोमल कलियों सी बच्चियों के लिए ट्री गार्ड बन सकते हैं | पर फिर वही बात ,बन सकते हैं .पर बनते नहीं हैं .......

अगर ट्री गार्ड मानवीय जीवन के सन्दर्भों में देखी जाए ,तो हर श्वांस उनकी शुक्रगुजार है | मिस्त्री के धागे की ठोकर की तरह , ये लगभग समाज के और सम्बन्धों की हर कुरूपता का पूर्वाभास सा करा जाती हैं और सुरक्षा के प्रति चेता सा देती हैं | वैसे ये ट्री गार्ड सरीखे दायरे उस समय तो बड़े ही बोझिल और जीवन की गति को कम करते लगते हैं ,परन्तु बाद में लगता है पौधे के सुरुचिपूर्ण आकार और दृढ़ता के लिए ये बेहद अनिवार्य थे | 

आज मैं भी अपने जीवन के हर ट्री गार्ड के प्रति आभारी हूँ और प्रयास करूंगी कि मैं भी एक अच्छी ट्री गार्ड बन पाऊँ !
                                                                                                                                      -निवेदिता 
                                                                                                                                             

16 टिप्‍पणियां:

  1. जिनको चाहते हैं उन्हें सुरक्षा देनी पड़ती है, नित देखना पड़ता है। काश, हम पेड़ों को भी अपना समझ लें।

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  2. "अगर ट्री गार्ड मानवीय जीवन के सन्दर्भों में देखी जाए ,तो हर श्वांस उनकी शुक्रगुजार है | मिस्त्री के धागे की ठोकर की तरह , ये लगभग समाज के और सम्बन्धों की हर कुरूपता का पूर्वाभास सा करा जाती हैं और सुरक्षा के प्रति चेता सा देती हैं | "


    आपके विचारों से सहमत।

    सादर

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  3. पौधों के जीवन सुरक्षा के लिए बनाये गयी ट्रीगार्ड का बिम्ब शिशु या शिशु सदृश युवा , अधेड़ , बुजुर्ग पर सटीक है.
    इन ट्री गार्ड्स को हमारा भी नमन एवं आभार !

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  4. पता ही नहीं चलता कि कब कौन सा हाथ दू:शासन बन जाएगा और आते - जाते राहगीर कुरुसभा के दिग्गज महारथी बन असहाय सा दीखते हुए चीर - हरण का वीडियो बनाने में व्यस्त हो जायेंगे |
    अगर ट्री गार्ड मानवीय जीवन के सन्दर्भों में देखी जाए ,तो हर श्वांस उनकी शुक्रगुजार है | मिस्त्री के धागे की ठोकर की तरह , ये लगभग समाज के और सम्बन्धों की हर कुरूपता का पूर्वाभास सा करा जाती हैं और सुरक्षा के प्रति चेता सा देती हैं
    आज मैं भी अपने जीवन के हर ट्री गार्ड के प्रति आभारी हूँ और प्रयास करूंगी कि मैं भी एक अच्छी ट्री गार्ड बन पाऊँ !
    समझ में नहीं आया कि किन पंक्तियों से मैं ज्यादा प्रभावित हुई और किन पंक्तियों का प्रशंसा ज्यादा करूं .... इसलिए सब उठा लाई .... (*_*)
    जीवन के हर ट्री गार्ड के प्रति मैं भी आभारी हूँ !

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  5. पता ही नहीं चलता कि कब कौन सा हाथ दू:शासन बन जाएगा और आते - जाते राहगीर कुरुसभा के दिग्गज महारथी बन असहाय सा दीखते हुए चीर - हरण का वीडियो बनाने में व्यस्त हो जायेंगे |
    अगर ट्री गार्ड मानवीय जीवन के सन्दर्भों में देखी जाए ,तो हर श्वांस उनकी शुक्रगुजार है | मिस्त्री के धागे की ठोकर की तरह , ये लगभग समाज के और सम्बन्धों की हर कुरूपता का पूर्वाभास सा करा जाती हैं और सुरक्षा के प्रति चेता सा देती हैं
    आज मैं भी अपने जीवन के हर ट्री गार्ड के प्रति आभारी हूँ और प्रयास करूंगी कि मैं भी एक अच्छी ट्री गार्ड बन पाऊँ !
    समझ में नहीं आया कि किन पंक्तियों से मैं ज्यादा प्रभावित हुई और किन पंक्तियों का प्रशंसा ज्यादा करूं .... इसलिए सब उठा लाई .... (*_*)
    जीवन के हर ट्री गार्ड के प्रति मैं भी आभारी हूँ !

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  6. पौधे हो या बच्चे बिना ट्री गार्ड के उनकी परवरिश अधूरी है,,,,

    RECENT POST ...: जिला अनूपपुर अपना,,,

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  7. कितना खूबसूरत फ़लसफ़ा दिया है दी!.....आपसे हमेशा ही कुछ न कुछ सीखने को मिला है....धन्यवाद

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  8. बच्चे और पौधे , सुरक्षा के मायने - वर्तमान से भविष्य तक की सोच पनपती है. बहुत बढ़िया - अव्वल लेखन

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  9. शानदार आलेख....ट्री गार्ड के माध्यम से गहन सन्देश ।

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  10. कल 26/08/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  11. ट्री गार्ड तो सभी के लिये जरूरी है चाहे पौधे हों या बच्चे।

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  12. बेहद भाव पूर्ण चिंतन ट्री गार्ड भी असुरक्षित हो गया है आज ...
    कितनी असुरक्षा घर गयी है मन में ....बेहद सार्थक आलेख ....

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  13. ट्री गार्ड के माध्यम से बहुत सार्थक चिंतन किया है ...

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