रविवार, 13 मई 2012

"मदर्स डे"




आज फेसबुक से लेकर ब्लॉग जगत तक हर जगह "मदर्स डे" की ही बात हो रही है | सब अपनी-अपनी माँ को याद कर रहे हैं ,उनके लाड़-दुलार और हाँ हँसती हुई फटकार को भी यादों की वीथियों से सम्हाल कर पुनर्जीवित कर रहे हैं | सच कहूँ तो कहीं अच्छा भी लग रहा है कि कम से कम इस दिन के बहाने ही सही इस रिश्ते पर सबका ध्यान जाता है ! मुझे लगता है कि सम्भवत: यही इकलौता रिश्ता है जो न रहने पर ही सबसे अधिक याद आता है | 

आज चाहती तो मैं भी थी अपनी माँ को ही याद करना ,परन्तु बीच रास्ते में ही मेरे विचारों की उंगलियाँ कुछ नन्हीं मासूम कलियों सी उँगलियों ने थाम लिया और अपने प्रश्नों के घेरे में हम सबको गुनाहगार सा महसूस करा गयीं | हम इन कोमल कलिकाओं की पुकार को अनसुना ही कर इनको जन्म ले पाने के पहले ही मौत के आगोश में सुला देते हैं ,माँ का आंचल तो इन मासूमों को मिल ही नहीं पाता | 
  
आज के इस शिक्षित युग में भी कन्या भ्रूण हत्या की सिर्फ बातें ही हो रही हैं | इनको बचाने का कोई भी प्रयास सिर्फ दिखावटी कागजी फ़ूल ही साबित हो रहा है | अपने वास्तविक जीवन में आज भी बेटी के माता-पिता होना एक बेचारगी का भाव ही ला देता है | इस पूरे परिप्रेक्ष्य में आज के सामाजिक हालात भी बहुत बड़े कारक का काम करते हैं | आज भी बेटियाँ सडक , पार्क , विद्यालय यहाँ तक कि घरों में निर्द्वन्द रूप से नहीं रह पाती हैं | हर समय एक अनसुनी आवाज़ को सुनने का प्रयास करती हुई हर पल एक अनदेखे खतरे का सामना करने को सजग रहने को विवश रहती हैं | शायद इसके मूल में उनकी सुरक्षा के लिए चिंतित हम जैसे अभिभावकों के दिए हुए दिशा-निर्देश ही हैं | हमारी मजबूरी ये है कि हम खतरों से बचाने के प्रयास में अपनी बच्चियों को कुछ अधिक ही डरा देते हैं , परन्तु उनको ये सब समझाना भी तो जरूरी है अन्यथा वो आज के हालात का सामना नहीं कर पाएंगी | 

इस पूरे प्रकरण में सबसे भयावह स्थिति जो आने वाली है वो यही है कि भविष्य में "मदर्स डे" मनाने के लिए माँ ही नहीं होगी क्योंकि आज की बेटियाँ ही कल की आने वाली पीढी की माँ होती हैं | 
                                                                                                       -निवेदिता 

12 टिप्‍पणियां:

  1. मर्मस्पर्शी ...सार्थक चिंतन ...!!

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  2. आज की बेटियाँ ही कल की आने वाली पीढी की माँ होती हैं |
    अति सुंदर भाव पुर्ण अभिव्यक्ति ,...

    MY RECENT POST ,...काव्यान्जलि ...: आज मुझे गाने दो,...

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  3. मा की ममता क भी कुछ अंदाज़ होते हैं
    जागती आँखों मैं भी कुछ खवाब होते हैं
    ज़रोरी नही की घाम मैं निकले आँसू ही,
    मुस्कुराहते आखों मैं भी सैलाब होते हैं ...

    मातृदिवस की शुभकामनाएँ

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  4. माँ आस पास हो न हो. किन्तु उसके होने का अहसास हमेशा ही बना रहता है. शुभकामनाएं !

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  5. .


    मां है तो हम हैं , सारी सृष्टि है …

    सार्थक चिंतनपरक पोस्ट !
    आभार !


    मंगलकामनाओं सहित…
    -राजेन्द्र स्वर्णकार

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  6. एक अजब दिशा में भागा जा रहा है समाज। जब तक समझ आयेगा, अनर्थ हो चुका होगा।

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  7. भविष्य की माओं को सुरक्षित करने के लिए कन्या भ्रूण हत्या बंद होनी ही चाहिए !
    सार्थक प्रस्तुति !

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  8. मन को छूते हुए भाव ... अनुपम प्रस्‍तुति।

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  9. बहुत ही बढ़िया भावपूर्ण सार्थक आलेख ....

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  10. भयावह दिन होगा जब मदर्स डे मनाने के लिये मां नहीं होगी। लेकिन मुझे लगता है कि ऐसा कभी होगा नहीं।

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