मंगलवार, 20 दिसंबर 2011

मौसम का अवसाद !

           ठंड का मौसम व्यक्ति को आत्मकेंद्रित कर देता है | पूरी दुनिया से काट कर एकदम अकेला | जल्दी से छा  जाने वाला अन्धेरा ,बिना किसी मजबूरी के घर की गर्म परिधि से न निकलने पर मजबूर कर देता है | परन्तु यही एहसास अपनी व्यस्त जीवनचर्या को जल्दी समेट कर मानसिक शून्यता का एहसास करा जाता है | अपने निकट सम्पर्कों से कट कर सिर्फ फोन तक सीमित हो जाने पर सोचने को बहुत कुछ देता है |
           ऐसा अकेलापन अक्सर अवसाद को भी जन्म देता है | ज़िन्दगी से कुछ झूठी-सच्ची शिकायतें भी सर उठा झाँकने लगती हैं | पाया-अनपाया का हिसाब करते हुए ,निराशा का कोई लम्हा भारी हो जाता है और खुद अपने ही अस्तित्व से इतना वैरभाव बढ़ जाता है कि आत्मघाती कदम उठाने में एक पल भी नहीं लगता है | आत्महत्या के अधिकतर हादसे इस मौसम की उदासी के कारण भी होते है जहां नकारात्मकता हावी रहती है |
           हर तरफ फ़ैली हुई धुंध चौबीस घंटों में से मात्र सात-आठ घंटे ही दूसरों की शक्लें और आवाज़ सुनने देती है | मौसम की धुंध मन में भी घर कर लेती है | मृत्यु के बाद शरीर का ठंडा हो जाना ,शायद इस सच का ही आभास देता है | शरीर के अंत से जैसे रिश्तों की यादों पर भी पाला पड़ जाता है ,वैसे ही वंचित होने का एहसास अवसाद में बदल कर अंत की तरफ कदमों को बढ़ा लेता है | इस ठंड के मौसम के अवसाद से ज़िन्दगी अक्सर हार जाती है !

18 टिप्‍पणियां:

  1. अपना अपना नज़रिया है। मैं तो एकदम सहमत नहीं हूँ आपकी बात से। ठंडी का मौसम तो मुझ में दुगने उत्साह का संचार करता है। खाया-पिया मस्त पच जाता है। मन पसंद की चीजें खाने की हिम्मत जुटा पाता हूँ। बाहर से कटता हूँ तो थोड़ा आत्मकेंद्रित होने..चिंतन करने..लिखने पढ़ने का मूड बनता है। वैसे भी ब्लॉगर कहां कट पायेंगे शेष दुनियाँ से...! वे तो सबेरा हुआ कि भिड़ गये।

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  2. वहाँ ठंड प्रचंड है, यहाँ मौसम मेहरबान..

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  3. AB TO YAHA BHI THAND BAD GYI HAI ...AUR AB YAHA BHI PRAISTHITIYAN WAISI HI HAI ,SABSE ALAG

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  4. शुक्रिया दोस्तों :)
    देवेन्द्र पाण्डेय जी :ठंड का मौसम अकेले पड गए लोगों के लिए ऐसा होता है ...... मुझे तो ये मौसम अच्छा लगता है क्योंकि इसी समय बच्चों की छुट्टियाँ होती हैं और उनके आने पर तो उत्सव ही रहता है :)

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  5. बेहतरीन प्रस्‍तुति
    कल 21/12/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्‍वागत है, मेरी नज़र से चलिये इस सफ़र पर ...

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  6. baat sirf thand ki hi nahi akelepan ki hai aapse sahmat hoon ki akelapan avsaad ko janm de sakta hai par yahi akelapan aatm-manthan ke liye bhi sahayak ho sakta hai.....nice post.

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  7. मौसम भी इंसानी फितरत का पर्याय है , उसने भइये अदा सायद
    इंसान से ही सीखी हो | सुन्दर लेख .

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  8. mausam jaisa aap mahsoos karna chahe vaisha hi ho jaata hai. thand me bhee garmee lagne lagtee hai chahte hi kabhee kabhee.

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  9. सारे मौसमों में सबसे बेहतर मौसम ठंड होता है, ये तो पढा था, जाना था, समझा था...... महसूस किया था....
    अब ये नई बात समझ नही आई.......

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  10. ये सच है अँधेरे में या अधिक कोहरे में अक्सर मन अवसाद से घिरता है और प्रकाश की तरह दोड़ने का मन करता है ... अच्छे से अभिव्यक्त किया है मन की स्थिति को ...

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  11. बहुत भावपूर्ण आलेख..अकेलेपन और ठण्ड का रिश्ता वास्तव में कष्ट दायी होता है..

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  12. सच कहा आपने.. आभार

    मेरे नये पोस्ट लिए काव्यान्जलि..: महत्व .. में click करे

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  13. आपकी यह पोस्ट ठण्ड के बारे में नए सिरे से सोचने पर विवश करती है. कटु सत्य कहा है आपने. यह ठण्ड जबरदस्ती का समाजवाद भी लादती है. न चाहते हुए भी घरों के भीतर दुबकना होता है. एकाकीपन खलता है. और पुरानी यादें उमड़ घुमड़ कर मन में हलचल मचा देती है जिसकी ओर आपने इशारा किया है.
    सच को बयां करते इस लेख के लिए आभार.

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  14. बदलते मौसम सी बदलती ज़िंदगी...बहुत सही बात कही है आपने

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