शनिवार, 14 मई 2016

छुम छन्नन्न छुम छन्नन्न ...........



कुछ लम्हे यूँ ही चुरा लूँ वक़्त से 
कभी साज़ से कभी आवाज़ से
कहीं रंगों सी रंगीन खिले चमक
कहीं बच्चों के खिलौनों सी हो
मासूम छुवन .......
तपती दुपहरी में अल्हण सी थिरक
झूमें लरजते बादलों की धड़कन
बादलों में खिले न खिले इंद्रधनुष
मन में कहीं कम न पड़े ये रसरंग
छुम छन्नन्न छुम छन्नन्न ..... निवेदिता

7 टिप्‍पणियां:

  1. जय मां हाटेशवरी....
    आप की रचना का लिंक होगा....
    दिनांक 15/05/2016 को...
    चर्चा मंच पर...
    आप भी चर्चा में सादर आमंत्रित हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  2. आज की ब्लॉग बुलेटिन अन्तर्राष्ट्रीय नागर विमानन कोड मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ...

    सादर आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर

    http://onkarkedia.blogspot.in/

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर

    http://onkarkedia.blogspot.in/

    उत्तर देंहटाएं