सोमवार, 3 फ़रवरी 2014

"ईश्वरीय वरदान सा अपना साथ "


यह इत्तिफ़ाक ही तो है ,
जो अपना साथ है 
ना मैं तुम्हे जानती ,
न तुम मुझे पहचानते 
मैं तो थी अपनी पढ़ाई में मस्त
 तुम थे अपना कैरियर बनाने में व्यस्त 
शायद था , तुम से मिलना,
शाश्वत सत्य 
सीप में मोती सा
सहेज रखा 
इसे ही कहते हैं
जन्म -जन्मातर का साथ 
आज जीवन की इस मधुरिम बेला में 
लगता है सब तो पा लिया 
प्यारे से दो चाँद -सितारे 
आस्मां से मांग लाये 
सच सज गया
अपना मन -आंगन
शायद इस जीवन का ही
दिया सबने आशीर्वाद 
तभी तो मांगती हूँ 
जन्म -जन्म का साथ 
इन छब्बीस वर्षों का साथ ,
एक प्यारे सपने सा सजा है
स्वपनीली आखों में 
तुम्हे भी मुबारक -मुझे भी मुबारक 
ये ईश्वरीय वरदान सा अपना साथ .........  निवेदिता  :)

18 टिप्‍पणियां:

  1. हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें आप दोनों को ...!!

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  2. बहुत सुंदर भाव ....आपका स्नेह साथ यूँ ही बना रहे .... शुभकामनायें

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  3. बहुत बहुत शुभकामनायें ... भावपूर्ण उदगार ...

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  4. सौभाग्यवती भव!! ये साल शताब्दियों में फैलाते जाएँ।।

    बस यही शिकायत है की मुझे शुभकामनाएं नहीं मिलीं... अब मत देने आना, बस मुझे मिल गयी।
    :)

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    1. इधर कुछ दिन अपने अन्तर्मन में ही डुबकी लगाये हुए थी तो उहां पहुंचने में देरी हो गयी :( ....बाकिया फोन से तो मुबारकबादी दिये रहे न ह्म और भाभी से भी बतियाये रहे ..... कौनो बात नही न आप दोनों को , इहां हमरे घर में भी ,बहुत - बहुत बधाई ..... और हाँ अब फोनवा तो आपो करिये लीजिये ... सादर !

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  5. रब ने बना दी जोड़ी ....:) सदा बना रहे यह साथ इसी दुआ के साथ दिल से बहुत-बहुत बधाई और ढ़ेर सारी शुभकामनायें दी....:))

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  6. बहुत ही सुन्दर भावो की शानदार अभिव्यक्ति ... सफल जोड़ियाँ तो शाश्वत सत्य ही होती है . बहुत खूब ..

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  7. बहुत सुन्दर :) .. जारी रहे सफर भी , साथ भी , और प्रेम शब्द भी

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