शनिवार, 31 अगस्त 2013

क्यों आते हो .......




एक दिन 
दिल ने लचक कर 
आँसुओं  से कहा 
क्यों आते हो …… 
आँखें भी 
थक गईं हैं 
तुम्हे ……… 
हाँ तुम्हे 
स्थान देते - देते 
सब तस्वीरें 
धुंधला गईं 
यादों की टीस 
सहते -सहते !
 
ये शिकवे 
सुन - सुन कर 
आँसुओं ने भी 
थक कर 
घर नया 
तलाश लिया  
आँखों में तो
रेत सी रूखी 
खुश्की 
आ ही गयी  
मगर दिल  ……
क्यों इतना  
नम औ भारी सा 
हो गया  ……
                   -- निवेदिता 


22 टिप्‍पणियां:

  1. साधू साधू
    एहसासों का शब्दमाला

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  2. क्यूंकि उन आंसुओं ने अब दिल में जगह बना ली है.
    बेहद भावपूर्ण रचना...

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  3. कल 02/09/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद!

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  4. बहुत ही कमाल की पंक्तियां निवेदिता जी । बहुत सुंदर

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  5. आने दो जो आना चाहें,
    अपनी पीर बताना चाहें।

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  6. आपकी यह रचना आज रविवार (01-09-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

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  7. आँसुओं से निकलने न दी .... दिल में घनीभूत हुई..
    सुंदर अभिव्यक्‍ति ।

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  8. खुबसूरत मोती……… सुन्दर भावपूर्ण………….

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  9. इन आंसुओं से जीवन में नमी रहती है ... इसके जरिये दर्द बह जाता है ... नहीं तो जम जाता है भारीपन दिल के आसपास ...

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  10. आँसुओं ने भी थक कर घर नया तलाश लिया आँखों में तो रेत सी रूखी खुश्की आ ही गयी मगर दिल ……क्यों इतना
    नम औ भारी सा हो गया …बेहद सुंदर एहसास और भावपूर्ण रचना....

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