रविवार, 23 दिसंबर 2012

शब्दों की घुटन .....




रंगों की भाषा भी 
बड़ी अजीब होती है 
शोख चपल तरल 
अनकही कह जाती 
भाषा कुछ स्वर भी 
सौगात में दे जाती 
मन में बसी खुशी 
खिलखिलाहट बनती 
मन की टूटन 
आंसुओं में बात करती 
बहुत कचोटता है 
रंगों का बेरंग होना 
पर्दों की रंगीनियाँ 
बदरंग हो बेजान कर 
पीड़ा के स्वर कण्ठ में 
बेबस दम तोड़ जाते हैं 
पहियों की रफ्तार 
नि:शब्द कर तिल-तिल 
जीतेजी मृत्यु वरने को 
आमंत्रित करती जाती ....
                             -निवेदिता 



14 टिप्‍पणियां:

  1. :-(
    महसूस किया इन शब्दों को(और घुटन को भी)....
    सस्नेह
    अनु

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  2. जिसको दर्द होता है असली बात वो ही जानता है।

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  3. दर्द की चीख
    निकलती है जब
    घुटती साँसे

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  4. रंगों की भाषा भी
    बड़ी अजीब होती है

    sach kaha...

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  5. रंगों की भाषा या मौन का संवाद .. चुपचाप ही बहुत कुछ कह जाता है ...

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  6. "बहुत कचोटता है
    रंगों का बेरंग होना"

    सचमुच "बहुत कचोटता है"

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  7. पीड़ा के स्वर कण्ठ में
    बेबस दम तोड़ जाते हैं,,,,बेहतरीन प्रस्तुति,,निवेदिता जी,,,

    recent post : समाधान समस्याओं का,

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  8. रंग नहीं,
    कुछ संग नहीं तब,
    जीवन की रजधानी सूनी।

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  9. मन की टूटन
    आंसुओं में बात करती
    बहुत कचोटता है
    रंगों का बेरंग होना,

    बखुब!

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  10. मन की घुटन का अजीब सा संसार ...जो सोच से शुरू हो कर सोच पर ही खत्म होता है

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  11. वाह..बहुत खूब बयां हुई है मन की घुटन।।।
    नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।।।

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