रविवार, 10 मई 2020

पैरोडी : कोई होता जिसको अपना ...



कोई होता जिसको अपना ,हम अपना कह लेते यारों
पास नहीं तो दूर ही होता ,लेकिन कोई सहायक होता ।

चाय बना कर जब मैं आती ,बर्तन चाय के वो धो जाता
बिखरी हुई हल्दी के दाग ,काश कोई आ कर के छुड़ाता
साफ - सफ़ाई कर के जाता ,महरी सम प्रिय मेरा होता
कोई होता ...

पौधों में पानी वो देता ,पौधे सूख नहीं फिर जाते
फूलों की खुशबू बस जाती ,डलिया ऐसे सजाता
खाद - दवा दे उनमें दे जाता ,कोई माली बन जाता
कोई होता ...

कपड़े भिगो जब मैं आती ,मुगड़ी चला वो धो जाता
धुले हुए कपड़े फैलाने ,बाल्टी लेकर छत पर जाता
धुले हुए कपड़े प्रेस कर जाता ,धोबी सम प्रिय मेरा होता
कोई होता ...
               ... निवेदिता श्रीवास्तव 'निवी'

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