गुरुवार, 1 मार्च 2012

श्वांसों का एहसास


इस सपनीले से
मौसम की
चहकती हवाएं
मिट्टी से नमी
चुराती ,कहीं
पत्तों को एक नया
आशियाना बसाने का
झूठा दिलासा देती
फागुनी रंगों की
चांदनी बरसाते
जज़्बातों को उलझा
नित नवल
सवालों की
पिचकारी सजाती हैं
कभी ज़िन्दगी की
थकान का इज़हार
और कभी उससे ही
चाहती जवाब हैं
ज़िन्दगी की थकान
अक्सर मन से
क़दमों पर उतर जाती है
तभी अचानक ही
जैसे कोई
अवचेतन को चेतन कर
सहला जाता है
ज़िन्दगी कभी भी
कुछ भी न चाहती है
न ही मांगती है
ये तो बस कुछ
श्वांसों का एहसास मांगती है ......
                              -निवेदिता 

26 टिप्‍पणियां:

  1. ये तो बस कुछ
    श्वांसों का एहसास मांगती है ......वाह क्या बात कही है…………बहुत सुन्दर

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  2. ज़िन्दगी कभी भी
    कुछ भी न चाहती है
    न ही मांगती है
    ये तो बस कुछ
    श्वांसों का एहसास मांगती है ......

    आखिर में एक अच्छी कविता बन ही गयी दोस्त.

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  3. बहुत सुंदर अहसास,बेहतरीन रचना के लिए बधाई,...

    MY NEW POST ...काव्यान्जलि ...होली में...

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  4. भाव बोध को सहलाती बेहतरीन रचना .

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  5. आती जाती सांसें ही तो जीवन है !

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  6. एहसासों की कहानी की बहुत ही खुबसूरत अभिवयक्ति..... हर पंक्ति खुद में अर्थ समेटे है......

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  7. बहूत हि सुंदर रचना है..
    सुंदर भाव अभिव्यक्ती

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  8. ज़िन्दगी की थकान
    अक्सर मन से
    क़दमों पर उतर जाती है बहुत ही भावपूर्ण.....

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  9. सुन्दर..पोस्ट . होली की शुभ कामनाएं /
    मेरे भी ब्लॉग पर आये

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  10. इन्हीं अहसासों के बल पर ज़िन्दगी चलती रहती है।

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  11. बहुत सुन्दर भाव और बहुत ही अच्छी अभिव्यक्ति .
    "AAJ KA AGRA BLOG"

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  12. ये तो बस कुछ
    श्वांसों का एहसास मांगती है ....
    bahut khoob

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  13. कोमल एहसास ...!
    सुन्दर प्रस्तुति !

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  14. बहुत सुन्दर कविता. अन्तिम पंक्तियाँ मन को कहीं गहरे तक छू जाती है...... आभार!

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  15. सुँदर अहसास कोमल शब्दों में लिपटे हुए . आभार

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  16. सच है जिंदगी तो बस जीना चाहती है .. स्वांसों पे टिकना चाहती है ...

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  17. ये तो बस कुछ
    श्वांसों का एहसास मांगती है ......bahut hi badhiya

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  18. वाह क्या बात है !!! अंतिम पंक्तियों ने जादूकर दिया... :)

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  19. श्वांसो का एहसास! क्या बात है। :)

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