शुक्रवार, 10 दिसंबर 2010

काश......

काश मन हमारा स्लेट होता ,
हमारे पास एक उजला लम्हा होता ,
उनका  नकारना हम स्वीकार पाते ,
उलझनों पर सफ़ेदी फ़ेर पाते ,
उनकी अनदेखी को न देख  पाते ,
उस न को अपना बना पाते ,
काश कुछ वो समझ पाते ,
काश कुछ हम समझा पाते ......

2 टिप्‍पणियां:

  1. "काश मन हमारा स्लेट होता,
    और लिखने को एक उजला लम्हा होता"
    क्या बात है ,बहुत ही अर्थपूर्ण रचना। बधाई।

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  2. बहुत सुंदर और उत्तम भाव लिए हुए.... खूबसूरत रचना......

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