बुधवार, 10 अगस्त 2016

ये छतरी है मेरे दुलार की .....



मुश्किलों की बरसात में 
बेवजह किसी तकरार में
याद में ये बसाये रखना
ये छतरी है मेरे दुलार की
मुस्करा कर आ जाना ... निवेदिता

6 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (12-08-2016) को "भाव हरियाली का" (चर्चा अंक-2432) पर भी होगी।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. इस छतरी की छाया में उसका हकदार जरूर आएगा ...

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  3. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, "बस काम तमाम हो गया - ब्लॉग बुलेटिन “ , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  4. ये छतरी है मेरे दुलार की...सुन्दर ।

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