मंगलवार, 12 जुलाई 2016

मन बावरा भटक जाता है ......


हर कदम पर
ज़िन्दगी मुझसे
और मैं भी
ज़िन्दगी से
सवाल पूछ्तें हैं

इन सवालों के
जवाब तलाशती
राहें भी कहीं
अटक सा जाती हैं
नित नये सवालों की
उलझनें सुलझाती
और भी उलझती सी
मन के द्वार तक
दस्तक नहीं दे पातीं
एक अजीब सा
सवाल जगा जातीं हैं
हम वो सवाल भी
क्यों हैं पूछते ,
जिनके जवाब
हम देना नहीं चाहते
शायद सवाल तभी
जाग पातें हैं
जब जवाब देने का
ज्ञान कहीं सो जाता है
अनजानी-अनसुलझी
वादी में मन बावरा
भटक जाता है ......... निवेदिता
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4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" सोमवार 18 जुलाई 2016 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  2. बहुत सुन्दर रचना...
    आपको जन्मदिन की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाएं!

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