बुधवार, 16 मार्च 2016

स्ट्रेस बतर्ज वैक्यूम ......

का ," सुनो तुम कुछ दिनों से स्ट्रेस्ड दिख रही हो  .... क्या हुआ  .... "
की ,"हम्म्म  .....  नहीं तो  .... "

कुछ दिनों बाद फिर से यही बातें  ..... 
का ," सुनो तुम अभी भी स्ट्रेस्ड दिख रही हो  .... क्या हुआ  .... "
की ,"हम्म्म  .....  नहीं तो  .... " 



शाम को ऑफिस से लौट कर चाय पीते हुए  ..... 
का ,"सुनो  .... एक बात बोलूँ  ... "
चाय के कप में बेमतलब सी चम्मच हिलाते हुए की ने का को देखा ,"अब क्या हुआ  .... "
का ,"मैं आज ऑफिस से लौटते हुए बाजार चला गया था  .... "
की आखों में बिना किसी प्रतिक्रिया लिये निरपेक्ष सी ,बस का को देखती है  ... 
का ,"मैं तुम्हारे लिए कुछ लाया हूँ ,देखोगी  .... "
की निर्विकार सी ,"ह्म्म्म्म  ..... "
का हड़बड़ाया सा एक गेंद सी की की तरफ बढ़ाते हुए ,"ये लो  .... "
की ,"अब मैं इसका क्या करूंगी  .... मैं तो अब खेलती नही और बच्चे ,वो तो  ...... "
की का वाक्य अधूरा सा रह गया  ...... 
का ,थोड़ी सी उलझन में ," सुनो न ये स्ट्रेस बस्टर है  .... इसको तुम यूज़ करोगी तो तुमको बेहतर लगेगा  .... "
की शांत थी ," नहीं मुझे कोई स्ट्रेस नही है  .... "
का ," फिर तुम इतनी उदास सी  ..... "
की ,"नहीं मुझे कोई स्ट्रेस नही है ,बस वैक्यूम .... "
की चाय के कप किचेन में रख कर बालकनी में पक्षियों को तलाश रही है  .... 
और  ..... 
वो स्ट्रेस बस्टर का के हाथों में है  ..... निवेदिता 

2 टिप्‍पणियां:

  1. कमाल का स्ट्रेस, गज़ब का वैक्यूम.... और का है कि स्ट्रेस समझ रहा है, वैक्युम की ओर उसका ध्यान ही नहीं....

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  2. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन धरती से अंतरिक्ष तक बेटियों की धमक - ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

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